नई दिल्ली:– बीसलपुर के गांव रिछोला सबल के एक ग्रामीण का माथा उस समय चकरा गया जब वह महीने का राशन लेने डीलर के पास पहुंचा। राशन डीलर ने उसे बताया कि वह और उसके परिवार के चार लोग जिंदा नहीं है, इसलिए उसे राशन नहीं दे सकता। अब ग्रामीण खुद और परिवार के लोगों को जिंदा होने का सबूत देता फिर रहा है।
इतना ही नहीं जिंदा ग्रमीण को कागजों में मृत दिखाकर उसका नाम भी राशन कार्ड से काट दिया गया है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब बुजुर्ग राशन लेने डीलर के पास गया। जिस पर डीलर ने कहा कि तुम मर चुके हो, तुम्हें राशन नहीं मिलेगा। यह सुनते ही बुजुर्ग के होश फाख्ता हो गए। अब बुजुर्ग को जिंदा होने के सबूत देने पड़ रहे हैं।
जिले के बीसलपुर ब्लाक स्थित रिछोला सबल गांव लईक अहमद ने बताया कि जब वह राशन लेने कोटेदार की दुकान पर पहुंचे, तो उन्हें जानकारी मिली कि उनके राशन कार्ड से चार यूनिट निरस्त कर दिए गए है। जांच करने पर पता चला कि उनके परिवार में लईक अहमद, उनके बड़े बेटे दिलशाद हुसैन उनके बेटे की बेटी नुजहत फातिमा और निकहत फातिमा को मृत दर्शाकर नाम हटा दिए गए हैं।
इस मनमानी कार्रवाई से परिवार राशन जैसी मूल सुविधा से वंचित हो गया। इसी गांव के अशफाक हुसैन और उनके बेटे के साथ भी यही स्थिति सामने आई। दोनों जीवित हैं, इसके बावजूद विभागीय अभिलेखों में उन्हें मृत दिखाकर राशन कार्ड से नाम काट दिया गया। पीड़ितों का कहना है कि न तो उनसे कोई सत्यापन कराया गया और न ही किसी प्रकार की सूचना दी गई।
नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति का नाम राशन कार्ड से हटाने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में नियमों को दरकिनार कर दिया गया। पीड़ित परिवार अब पूर्ति विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं और अपने नाम दोबारा राशन कार्ड में दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं।
