नई दिल्ली:– मकर संक्रांति मुख्य रूप से सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने (संक्रमण) और उत्तर दिशा की ओर बढ़ने (उत्तरायण) का त्योहार है, प्राचीन ग्रंथों में बताया गया है कि इस दिन से दिनों की अवधि बढ़ने लगती है, जिससे प्रकृति में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देता है,किसान इसे फसल कटाई का संकेत मानते हैं तथा इस दिन स्नान, दान (तिल, गुड़, खिचड़ी), और पतंगबाजी जैसे अनुष्ठानों से सूर्य और प्रकृति का आभार व्यक्त किया जाता है।
यह धार्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ, जिसमें सूर्य देव का सम्मान और नई शुरुआत का जश्न मनाया जाता है।
सूर्य का राशि परिवर्तन: इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इसे मकर संक्रांति कहते हैं।
उत्तरायण की शुरुआत: सूर्य 6 महीने के दक्षिणायन के बाद उत्तरायण (उत्तर दिशा की ओर) होता है, जो शुभ माना जाता है और देवताओं का दिन शुरू होता है।
ऋतु परिवर्तन: यह त्योहार सर्दी के कम होने और दिन के लंबा होने का संकेत देता है, जो फसल और नई शुरुआत से जुड़ा है।
धार्मिक मान्यता: यह सूर्य देव और उनके पुत्र शनिदेव (मकर राशि के स्वामी) के मिलन का दिन है, जो सद्भाव का प्रतीक है; गंगा स्नान से पाप मुक्ति मिलती है।
वैज्ञानिक/स्वास्थ्य लाभ: पतंग उड़ाने से शरीर को सूर्य की किरणों (औषधीय गुणों वाली) मिलती हैं, जो बीमारियों को दूर करती हैं; तिल-गुड़ शरीर को ठंड से बचाता है,शास्त्रों में बताया गया है कि तिल पवित्रता का प्रतीक है और गुड़ मिठास व सौहार्द का संदेश देता है। कई स्थानों पर तिल-गुड़ के लड्डू बनाकर मंदिर या जरूरतमंदों में वितरित किए जाते हैं। दान-पुण्य: खिचड़ी, तिल, गुड़, और वस्त्र दान करने का विशेष महत्व है, जिससे शुभ फल मिलता है।
