नई दिल्ली:– आज बच्चों के हाथ में पढ़ाई के नाम पर स्मार्टफोन और AI टूल्स पहुंच चुके हैं। ऐसे में माता-पिता के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि बच्चे किसी गलत या संवेदनशील कंटेंट के संपर्क में न आ जाएं। हालिया सर्वे में Salesforce ने बताया कि भारत में 73% लोग AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें 65% हिस्सेदारी Gen-Z की है। वहीं सोशल मीडिया और AI चैटबॉट्स के बढ़ते इस्तेमाल से फेक न्यूज, डीपफेक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े खतरे भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में Grok जैसे प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर भी सवाल उठे हैं।
ऐसे में जरूरी है कि बच्चों के लिए AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाया जाए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।
फोन मॉनिटरिंग जरूरी
माता-पिता को बच्चों की सिर्फ स्क्रीन नहीं, बल्कि डिजिटल एक्टिविटी पर भी नजर रखनी चाहिए। इसके लिए Watcher जैसे ऐप्स मददगार हैं, जिनसे नोटिफिकेशन, लोकेशन और ऐप यूज टाइम देखा जा सकता है।
टूल्स में पेरेंटल कंट्रोल ऑन करें
ChatGPT: फैमिली अकाउंट के जरिए बच्चों की चैट लिमिट और कंट्रोल की जा सकती है।
Google Gemini: Google Family Link के जरिए एक्सेस और ऐप कंट्रोल संभव है।
YouTube: फैमिली लिंक और फैमिली सेंटर से सर्च, रिकमेंडेशन और टाइम लिमिट सेट करें।
Instagram: ‘Supervision for Teens’ मोड से AI चैट, कीवर्ड और स्क्रीन टाइम कंट्रोल किया जा सकता है।
एक्स्ट्रा सेफ्टी के लिए AI ऐप्स
Net Nanny, Canopy और Qustodio जैसे पैरेंटल कंट्रोल ऐप्स AI की मदद से सेंसिटिव कंटेंट ब्लॉक करते हैं और पेरेंट्स को रिपोर्ट भेजते हैं।
