नई दिल्ली:– कोविड-19 से हुई मौत के बाद बीमा क्लेम कंपनी की ओर खारिज कर दिया गया। पीड़ित ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में आवेदन किया। इसकी सुनवाई के बाद आयोग ने बीमा कंपनी को जीवन बीमा की राशि एक करोड़ रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत अदा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए दो लाख रुपये अलग से भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में कौशल प्रसाद कौशिक ने अपना आवेदन प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि वे अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम 2020 में एक करोड़ रुपये का जीवन बीमा कराया था। सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हो गईं। इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई।
मृत्यु के बाद पति ने बीमा कंपनी के समक्ष नियमानुसार क्लेम प्रस्तुत किया। इस पर बीमा कंपनी ने पूर्व बीमारी का हवाला देते हुए बीमा दावा खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि बीमाधारक ने पालिसी लेते समय अपनी स्वास्थ्य संबंधी पूरी जानकारी नहीं दी थी, इसलिए क्लेम देने का कोई आधार नहीं बनता। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर पति ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने बीमा कंपनी के तर्कों की गहनता से जांच की। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी पूर्व बीमारी को साबित करने में असफल रही। न तो कोई ठोस चिकित्सीय प्रमाण पेश किया गया और न ही यह सिद्ध किया जा सका कि कथित बीमारी का कोविड से हुई मृत्यु से कोई प्रत्यक्ष संबंध था। आयोग ने कहा कि केवल अनुमान के आधार पर क्लेम खारिज करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
संवेदनशीलता के साथ निर्णय ले कंपनी
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कोविड जैसी महामारी की स्थिति में बीमा कंपनी को संवेदनशीलता और नियमों के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए था। अनुचित रूप से दावा खारिज कर उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना दी गई, जिसके लिए कंपनी जिम्मेदार है। आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिए कि वह बीमाधारक को एक करोड़ रुपये की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। साथ ही मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए दो लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी किया जाए।
