नई दिल्ली:– महाशिवरात्रि पर देशभर के शिवालयों में भक्तों का तांता लगा है। उज्जैन में बाबा महाकाल का 11 फीट ऊंचे सेहरे से दिव्य श्रृंगार हुआ तो वहीं दूसरी तरफ काशी में दर्शन के लिए 5 किलोमीटर लंबी लाइन लगी है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 12 ज्योतिर्लिंगों समेत सभी मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। उज्जैन के महाकालेश्वर में जहां बाबा का अनूठा श्रृंगार हुआ है।
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के दरबार में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बार बाबा महाकाल का श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र है। भगवान महाकाल को 11 फीट ऊंचा और करीब 3 क्विंटल वजनी फूलों का सेहरा पहनाया गया है। इस सेहरे को बनाने के लिए विशेष रूप से थाईलैंड, नीदरलैंड और बेंगलुरु से दुर्लभ फूल मंगाए गए हैं।
महाकाल मंदिर में भक्तों की भीड़
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए महाकाल मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे। रविवार तड़के 2:30 बजे भस्म आरती के साथ शुरू हुआ दर्शन का यह सिलसिला सोमवार रात तक जारी रहेगा। प्रशासन का अनुमान है कि इस बार 10 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन करेंगे। सुरक्षा के लिए 2 हजार से ज्यादा पुलिस बल तैनात किया गया है।
गंगा स्नान के बाद लगी लंबी लाइन
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (काशी) में महाशिवरात्रि पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लाइन गोदौलिया और मैदागिन से भी आगे निकल गई है जिसकी लंबाई करीब 5 किलोमीटर बताई जा रही है। भक्तों के स्वागत में हेलीकॉप्टर और ड्रोन के जरिए फूलों की वर्षा की जा रही है।
गंगा के घाटों पर तड़के से ही लाखों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई और वहां से सीधे बाबा के दरबार की ओर रुख किया। प्रशासन ने कतार में लगे भक्तों के लिए पेयजल, मेडिकल कैंप और मैटिंग की व्यवस्था की है ताकि भीषण गर्मी और लंबी प्रतीक्षा के बावजूद श्रद्धालुओं को असुविधा न हो।
सिर्फ उज्जैन और काशी ही नहीं बल्कि देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम, झारखंड में भी भक्तों की भारी भीड़ है। वहां बाबा और माता पार्वती के गठबंधन की रस्म देखने लाखों लोग पहुंचे हैं। वहीं महाराष्ट्र के त्रयंबकेश्वर और गुजरात के सोमनाथ मंदिर में भी विशेष पूजा और दीपमालाओं का आयोजन किया गया है।
महाशिवरात्रि 2026 भारत की अटूट श्रद्धा और सांस्कृतिक भव्यता का गवाह बन रही है। विदेशी फूलों की महक और लाखों कंठों से गूंजते बम-बम भोले के नारों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया है।
