नई दिल्ली:– सोशल मीडिया पर ‘लाइक्स’ और ‘व्यूज’ की भूख किस कदर इंसानी जिंदगी पर भारी पड़ रही है, इसकी एक भयावह तस्वीर दिल्ली के द्वारका से सामने आई है। 3 फरवरी 2026 को हुए एक सड़क हादसे ने न केवल 23 साल के एक होनहार युवक की जान ले ली, बल्कि सड़क सुरक्षा और नाबालिगों के हाथ में स्टीयरिंग थमाने वाले माता-पिता की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
3 फरवरी की सुबह करीब 11:57 बजे, साहिल धनेश्रा अपनी बाइक से ऑफिस जा रहे थे। द्वारका साउथ थाना क्षेत्र के लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के पास एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो (UP57BM3057) ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़ी एक टैक्सी से जा टकराई, जिससे टैक्सी चालक भी गंभीर रूप से घायल हो गया। साहिल की मौके पर ही मौत हो गई।
‘फन रील’ और जानलेवा स्टंट बना कारण
साहिल की मां, इन्ना माकन के आरोपों ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। उनके अनुसार, यह महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि एक ‘आपराधिक गतिविधि’ थी।
रील का चक्कर: आरोप है कि 17 वर्षीय नाबालिग ड्राइवर अपनी बहन के साथ सड़क पर ‘स्पीड फन रील’ बना रहा था। उसकी बहन बगल में बैठकर वीडियो शूट कर रही थी।
- खतरनाक स्टंट: प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवार के अनुसार, स्कॉर्पियो गलत लेन में चल रही थी और ड्राइवर बस के ठीक सामने आकर स्टंट करने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान उसने साहिल को टक्कर मार दी।
13 पुराने चालान और फिर भी खुली छूट
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू गाड़ी का पिछला रिकॉर्ड है। साहिल की मां ने खुलासा किया कि जिस स्कॉर्पियो ने उनके बेटे की जान ली, उस पर पहले से ही ओवर-स्पीडिंग के 13 चालान लंबित थे। इसके बावजूद, आरोपी के पिता ने उसे बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाने से नहीं रोका। यह दर्शाता है कि कानून का डर न तो नाबालिग को था और न ही उसके अभिभावकों को।
कानूनी पेंच भी फंसा: आरोपी नाबालिग या बालिग?
हादसे के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन कानूनी पेच के कारण उसे राहत मिल गई:
उम्र का विवाद: शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में आरोपी की उम्र 19 साल दर्ज की थी और उस पर बालिग की तरह केस चलाना चाहती थी। हालांकि, बाद में मिले दस्तावेजों से उसकी उम्र 17 साल (नाबालिग) पुष्टि हुई।
जमानत: आरोपी को बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है।
पिता की भूमिका: पुलिस ने आरोपी के पिता को हिरासत में लिया था और बाद में रिहा कर दिया, लेकिन MV ACT (मोटर वाहन अधिनियम) के तहत चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया जाएगा।
एक मां का संघर्ष और इंसाफ की पुकार
मृतक साहिल अपनी मां का इकलौता बेटा था। इन्ना माकन ने एक सिंगल मदर के तौर पर उसे 23 साल तक अकेले पाल-पोसकर बड़ा किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि उनके बेटे की जान रील बनाने के शौक की वजह से गई है। ऑटोंप्सी रिपोर्ट के अनुसार, साहिल की मौत क्रेनियो-सेरेब्रल इंजरी (सिर की चोट) और आंतरिक अंगों में गंभीर चोट लगने के कारण हुई।
यह घटना केवल एक एक्सीडेंट नहीं है, बल्कि यह उस ‘रील्ज कल्चर’ का परिणाम है जहां सड़क को स्टंट का मैदान समझ लिया जाता है। 13 चालान होने के बावजूद एक नाबालिग को चाबी देना अभिभावकों की उस मानसिकता को दर्शाता है जहां “पैसे के दम पर कुछ भी करने” की छूट मान ली जाती है। अब सबकी निगाहें दिल्ली पुलिस पर हैं कि क्या वह इस मामले में कड़ी मिसाल पेश कर पाएगी ताकि भविष्य में कोई दूसरा साहिल ‘रील’ की भेंट न चढ़े।
