नई दिल्ली:– भारत अब अमेरिका के पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल हो गया है। हाल ही में, भारत ने AI इम्पैक्ट समिट में एक समारोह के दौरान इस गठबंधन में शामिल होने के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर सहित अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे।
अमेरिका, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और विविध बनाने के लिए इंडो-पैसिफिक देशों के साथ गहरे सहयोग की तलाश में है, और भारत इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत के शामिल होने के साथ अब इस रणनीतिक गठबंधन में कुल 10 देश शामिल हो गए हैं। आइए, समझते हैं कि पैक्स सिलिका गठबंधन क्या है, इसका उद्देश्य क्या है, और इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं।
पैक्स सिलिका गठबंधन क्या है?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पैक्स सिलिका AI और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका का एक प्रमुख प्रयास है, जो सहयोगी देशों के बीच नई आर्थिक सुरक्षा सहमति को बढ़ावा देता है। पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन पिछले साल 12 दिसंबर को वाशिंगटन में हुआ था, जिसमें भागीदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। “पैक्स” शब्द का अर्थ शांति, स्थिरता और समृद्धि है।
अमेरिका में आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेल्बर्ग ने इससे पहले कहा था कि 20वीं सदी में दुनिया तेल और स्टील पर निर्भर थी, लेकिन 21वीं सदी में यह कंप्यूटर और तकनीकी उन्नति पर आधारित है। इसके लिए जरूरी खनिज जैसे लिथियम और कोबाल्ट की आवश्यकता होती है। पैक्स सिलिका का उद्देश्य भरोसेमंद देशों के साथ मिलकर एक साझा योजना तैयार करना है, ताकि वे भविष्य में AI और नई तकनीकें तैयार कर सकें।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की माने तो इसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उच्च-तकनीकी फैक्ट्रियां और AI मॉडल सभी शामिल हैं। इस गठबंधन के तहत सदस्य देश मिलकर काम करने के लिए सहमत हैं, और उनका लक्ष्य समृद्धि, तकनीकी प्रगति और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
पैक्स सिलिका का मुख्य उद्देश्य
पैक्स सिलिका का एक प्रमुख उद्देश्य किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भरता को कम करना है। इसका मतलब यह है कि देशों को अपनी सामग्री, तकनीक, और उत्पादों के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, ताकि वैश्विक व्यापार में उन पर दबाव या शोषण न हो सके। इस पहल में खासतौर पर चीन की चुनौती को चुनौती देना और रेयर अर्थ मेटल्स (दुर्लभ खनिज) की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना शामिल है।
रेयर अर्थ मेटल्स धरती के अंदर पाए जाने वाले 17 दुर्लभ धातु हैं, जो आज के तकनीकी युग में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये धातु इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन निर्माण, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर, और उपभोक्ता वस्तुएं बनाने के लिए जरूरी हैं। वर्तमान में, चीन रेयर अर्थ मिनरल्स के वैश्विक खनन का लगभग 60-70 प्रतिशत नियंत्रित करता है। पैक्स सिलिका इस क्षेत्र में निर्भरता को कम करने का प्रयास कर रहा है।
पैक्स सिलिका में शामिल देश
हस्ताक्षर करने वाले देश:
भारत
ऑस्ट्रेलिया
ग्रीस
इज़राइल
जापान
कतर
दक्षिण कोरिया
सिंगापुर
संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
यूनाइटेड किंगडम
हस्ताक्षर किए बिना जुड़े देश:
कनाडा
यूरोपीय संघ (EU)
नीदरलैंड
आर्थिक सहयोग और विकास के लिए संगठन (OECD)
ताइवान
