कुरूद :–राजधानी रायपुर से कुछ किलोमीटर दूर, कुरूद विधानसभा क्षेत्र के जामगांव में स्थित मां मातंगी धाम इन दिनों आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां नियमित रूप से लगने वाले “दिव्य दरबार” में न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
धाम के पीठाधीश्वर प्रेम साई महाराज के सानिध्य में आयोजित इस दरबार में लोग अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्ची श्रद्धा से मां के दरबार में रखी गई हर प्रार्थना सुनी जाती है।
घड़ी बांधने की अनोखी परंपरा
मां मातंगी धाम की सबसे चर्चित मान्यता “घड़ी बांधने” की परंपरा है। बताया जाता है कि जिन लोगों का समय खराब चल रहा हो, वे यहां आकर अपनी घड़ी बांधते हैं। घड़ी भारतीय समयानुसार बांधी जाती है, लेकिन श्रद्धालुओं के अनुसार कुछ समय बाद वह स्वयं चलने लगती है। इसे लोग अपने जीवन में समय के अनुकूल होने और परिस्थितियों के सुधरने का संकेत मानते हैं।
हालांकि इस मान्यता को आस्था का विषय माना जाता है, लेकिन श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर गहरा विश्वास देखा जाता है।
ताला, जंजीर, घंटी और नारियल
धाम में बड़ी संख्या में लोग जंजीर के साथ ताला बांधते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं बंध जाती हैं और समस्या का समाधान होने पर भक्त दोबारा आकर ताला खोलते हैं।
इसके अलावा भक्त घंटी बांधते हैं और नारियल अर्पित करते हैं। धाम परिसर में जगह-जगह बंधी घंटियां और ताले यहां की आस्था का प्रतीक बन चुके हैं।
दूर-दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु
स्थानीय लोगों के अनुसार, धाम में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा सहित अन्य राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं। विशेष अवसरों और दिव्य दरबार के दौरान यहां मेले जैसा वातावरण बन जाता है।
धाम में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी यहां श्रद्धा के साथ भाग लेते हैं।
पीठाधीश्वर का संदेश
प्रेम साई महाराज का कहना है कि यह धाम केवल चमत्कार का नहीं, बल्कि श्रद्धा, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का केंद्र है। उनका कहना है कि जब व्यक्ति विश्वास के साथ प्रार्थना करता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है।
वे लोगों को संयम, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संदेश भी देते हैं।
आस्था और विश्वास का संगम
मां मातंगी धाम आज क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन का भी केंद्र बनता जा रहा है। जहां एक ओर यहां की मान्यताएं लोगों को आकर्षित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इससे बल मिल रहा है।
कुल मिलाकर, जामगांव स्थित यह धाम श्रद्धालुओं के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बन चुका है, जहां लोग अपने जीवन की कठिनाइयों का समाधान खोजने और नई उम्मीद के साथ लौटने की कामना लेकर पहुंचते हैं।
