नई दिल्ली:– डिजिटल अरेस्ट जैसे खतरनाक साइबर फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए WhatsApp को उन डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है, जिनका इस्तेमाल ठग लोगों को डराकर पैसे वसूलने में कर रहे हैं। यह स्कैम तेजी से बढ़ रहा था, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी एजेंसी बताकर लोगों को वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल गिरफ्तारी” का डर दिखाते थे और उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे। सरकार अब इस पर डिवाइस स्तर पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है, ताकि एक ही डिवाइस से बार-बार नए अकाउंट बनाकर ठगी करने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके।
इसके साथ ही WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स लागू करने, डिलीट अकाउंट का डेटा 180 दिनों तक सुरक्षित रखने और फर्जी APK व ऐप्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने पर भी विचार किया जा रहा है। दरअसल, डिवाइस ID एक यूनिक पहचान होती है, जिसमें IMEI नंबर, MAC एड्रेस, सीरियल नंबर और एडवर्टाइजिंग ID शामिल होते हैं, जिनकी मदद से किसी भी डिवाइस को ट्रैक किया जा सकता है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग पहले लोगों को फर्जी केस या पार्सल के नाम पर डराते हैं, फिर उन्हें वीडियो कॉल पर “जांच” के नाम पर बांधकर रखते हैं और पैसे ऐंठ लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तरह की ऑनलाइन गिरफ्तारी का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, इसलिए ऐसे कॉल या मैसेज पर घबराने की जरूरत नहीं है। अनजान नंबरों से आए कॉल पर भरोसा न करें, OTP या बैंक डिटेल्स साझा न करें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें, ताकि इस तरह के फ्रॉड से बचा जा सके।
