नई दिल्ली:– केंद्र सरकार ने गेहूं और धान की सरकारी खरीद से जुड़े आढ़तियों और सहकारी समितियों के लिए कमीशन दरों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। यह नई दरें रबी विपणन सत्र (RMS) 2026-27 से लागू होंगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य खरीद व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुचारु बनाना है, ताकि मंडियों में काम करने वाली एजेंसियों को बेहतर सहयोग मिल सके।
केंद्र सरकार का मानना है कि कमीशन बढ़ाने से खरीद प्रक्रिया में शामिल आढ़तियों और समितियों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों से उपज की खरीद तेज और व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी।
राज्यों की मांग पर लिया गया फैसला
कमीशन दरों में बदलाव का यह निर्णय राज्य सरकारों की मांग के आधार पर लिया गया है। इस संबंध में एक उप-समिति का गठन किया गया था, जिसमें भारतीय खाद्य निगम (FCI), विभिन्न राज्य सरकारों और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने मौजूदा कमीशन ढांचे की समीक्षा कर उसमें संशोधन की सिफारिश की थी। इसी के आधार पर केंद्र सरकार ने नई दरों को मंजूरी दी है।
सहकारी समितियों के लिए नई कमीशन दरें
सरकार ने सहकारी समितियों के लिए भी कमीशन में बढ़ोतरी की है, जिससे उन्हें सीधे तौर पर आर्थिक लाभ मिलेगा। सहकारी समितियों के लिए नई कमीशन दरें इस प्रकार से रहेंगी।
फसल
पुरानी दर (₹/क्विंटल)
नई दर (₹/क्विंटल)
गेहूं
27.00
29.79
धान
32.00
35.30
इस बढ़ोतरी से समितियों को प्रति क्विंटल अधिक भुगतान मिलेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता और भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
आढ़तियों को भी मिलेगा फायदा
हालांकि इस अपडेट में मुख्य रूप से सहकारी समितियों की दरें स्पष्ट की गई हैं, लेकिन आढ़तियों को भी इस फैसले से लाभ मिलेगा। कमीशन बढ़ने से मंडियों में उनकी भूमिका और मजबूत होगी और खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी।
साइलो में खरीद पर अलग नियम
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आधुनिक साइलो (भंडारण प्रणाली) के माध्यम से की जाने वाली खरीद पर अलग नियम लागू होंगे। साइलो में खरीद पर कमीशन की दर मंडी दर का 50 प्रतिशत ही होगी। इसका उद्देश्य आधुनिक भंडारण प्रणाली को बढ़ावा देना और लागत को संतुलित रखना है।
किसानों को कैसे होगा फायदा
सरकार के इस फैसले का सीधा असर किसानों पर भी पड़ेगा।
खरीद प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित होगी।
मंडियों में भीड़ और देरी कम होगी।
किसानों को समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी।
उपज बेचने में पारदर्शिता बढ़ेगी
जब खरीद एजेंसियों को बेहतर कमीशन मिलेगा, तो वे अधिक सक्रिय रूप से काम करेंगी, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी होगी।
खरीद व्यवस्था होगी मजबूत
सरकार का मानना है कि कमीशन दरों में बढ़ोतरी से पूरी खरीद प्रणाली को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल मंडियों में कामकाज आसान होगा, बल्कि गेहूं और धान की सरकारी खरीद अधिक प्रभावी और तेज भी हो सकेगी। यह कदम किसानों, आढ़तियों और सहकारी समितियों तीनों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। आने वाले रबी विपणन सत्र में इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
