नई दिल्ली:– अयोध्या में शुक्रवार को रामनवमी के अवसर पर रामलला का सूर्य तिलक हुआ। यह तिलक प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रामलला का दूसरा सूर्य तिलक था। तिलक का आयोजन दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में किया गया, जब भगवान के ललाट पर नीली किरणें पड़ीं।
सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का जन्म हुआ। इस महत्वपूर्ण अवसर पर 14 पुजारी गर्भगृह में मौजूद थे और विशेष पूजा की गई। इसके बाद आरती हुई और सूर्य तिलक के बाद कुछ समय के लिए रामलला के पट बंद कर दिए जाएंगे।
विशेष पूजा और भोग
सूर्य तिलक के बाद रामलला को 56 प्रकार के व्यंजन का भोग अर्पित किया जाएगा। इस विशेष पूजा के लिए अष्टधातु के 20 पाइपों से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया था, जिसमें 4 लेंस और 4 मिरर के जरिए सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक तक पहुंचाई गईं।
आरती और दर्शन
सुबह 5:30 बजे रामलला की आरती की गई, और भगवान को पीतांबर पहनाया गया। इस विशेष दिन पर भक्तों को आम दिनों के मुकाबले 3 घंटे अधिक दर्शन करने का मौका मिलेगा। श्रद्धालु सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक, यानी कुल 18 घंटे रामलला के दर्शन कर पाएंगे। पहले दर्शन का समय सुबह 6:30 से रात 9:30 तक था। राम जन्मभूमि परिसर में लगभग 10 लाख लोग रामलला के दर्शन करने के लिए पहुंचे हैं। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर भारी भीड़ देखी जा रही है, और लंबी-लंबी लाइनें लग चुकी हैं।
