नई दिल्ली:– वीआईपी और वीवीआईपी (जैसे मुख्यमंत्री, राज्यपाल आदि) को ले जाने वाले नॉन-शेड्यूल्ड विमान और हेलीकॉप्टर ऑपरेटर्स के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। डीजीसीए ने साफ कहा है कि फ्लाइट क्रू पर किसी भी तरह का दबाव नहीं डाला जाए, ताकि सुरक्षा से समझौता न हो।
वीआईपी की जरूरत के नाम पर आखिरी वक्त में होने वाले बदलाव सीधे क्रू से नहीं, सिर्फ ऑपरेटर्स मैनेजमेंट के जरिए ही कराए जाएं। मौसम से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। नई गाइडलाइन में ध्यान रखा गया है कि वीआईपी मूवमेंट के चक्कर में पायलट थकावट का शिकार न हों।
अब अगर कोई नेता दबाव डालता है, तो पायलट सीधे मना कर सकता है और उसकी जवाबदेही ‘मैनेजमेंट’ की होगी, न कि व्यक्तिगत पायलट की। दरअसल, 28 जनवरी को बारामती एयरपोर्ट पर प्लेन क्रैश में अजीत पवार समेत 5 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद से डीजीसीए ने वीआईपी मूवमेंट्स को लेकर नियमों में बदलाव किया है।
DGCA के नए नियम
पायलट और क्रू पर किसी भी तरह का दबाव नहीं डाला जाएगा।
वीआईपी की मांग पर आखिरी समय में बदलाव सीधे पायलट से नहीं बल्कि कंपनी मैनेजमेंट के जरिए होंगे।
विमान उड़ाने वाले पायलट के पास कम से कम 3,000 घंटे का अनुभव होना चाहिए। हेलीकॉप्टर पायलट के लिए कम से कम 2,000 घंटे का अनुभव जरूरी है।
हर ऑपरेटर को एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करना होगा। वही व्यक्ति सभी नियमों के पालन के लिए जिम्मेदार होगा।
रोहित पवार के 5 आरोप
लॉग बुक में फेरबदलः विमान के आधिकारिक उड़ान घंटे 4,915 बताये गए, जबकि वास्तविक उड़ान 8,000 घंटे से अधिक थी।
हवामान उल्लंघन: कम दृश्यता में लैंडिंग की अनुमति दी गई।
पायलट बदलाव: अंतिम समय में क्रू बदलकर सुमित कपूर को पायलट बनाया गया।
विमान पॉलिसी: हादसे से कुछ समय पहले पायलट सुमित कपूर के नाम पर इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई।
पायलट का बैकग्राउंडः सुमित कपूर पहले शराब पीने के कारण निलंबित रह चुके थे।
