नई दिल्ली:– 2 अप्रैल को रुपए में 12 सालों की एक दिन की सबसे बड़ी मजबूती दर्ज की गई. इंट्राडे में कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 163 पैसे तक मजबूत हुआ था. बता दें कि 30 मार्च को रुपए इतिहास में पहली बार 95 के नीचे फिसला था.
ईरान युद्ध से अब तक डॉलर के मुकाबले रुपया 4% कमजोर हो चुका है
इंडियन करेंसी मार्केट के लिए गुरुवार की सुबह एक बड़ी राहत लेकर आई. आज सुबह डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 130 पैसे मजबूत होकर 93.53 के स्तर पर खुला. कारोबार के दौरान रुपए में 1.7% यानी 163 पैसे की मजबूती दर्ज की गई जो 12 सालों की सबसे बड़ी मजबूती है. क्रूड ऑयल में तेजी और शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद रुपए में इस मजबूती का कारण RBI की तरफ से लिए गए 2 बड़े फैसले हैं. पहला NOP और दूसरा NDF. आइए विस्तार से पूरी बात समझते हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को बैंकों को डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट्स (Non Deliverable Forward) देने से रोक दिया है. इसका असर रुपए पर देखा जा रहा है. इससे पहले बैंकों के नेट ओपन पोजिशन (NOP) को लिमिट किया गया था. बता दें कि बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 94.83 के स्तर पर बंद हुआ था. 30 मार्च को डॉलर के मुकाबले रुपया इंट्राडे में 95.20 के स्तर तक फिसला था, लेकिन क्लोजिंग 94.37 पर हुई थी.
RBI ने रुपए को संभालने के लिए कौन से 2 फैसले लिए?
- NOP लिमिट पर लगाम
30 मार्च को रिजर्व बैंक ने बैंकों के NOP यानी नेट ओपन पोजिशन कि लिमिट 100 मिलियन डॉलर तय कर दी. इस नियम को 10 अप्रैल से लागू किया जा रहा है.
बैंकों के लिए नेट ओपन पोजिशन की लिमिट 100 मिलियन डॉलर कैप
रोजाना आधार पर रुपए में बैंक का नेट ओपन पोजिशन इस दायरे में रहेगा
10 अप्रैल से सभी बैंकों को आरबीआई के नए नियम को फॉलो करना होगा
- NDF पर बैन
रिजर्व बैंक ने बैंकों को रुपए में NDF यानी (Non Deliverable Forward) देने से मना कर दिया है. इसके अलावा रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को फिर से बुक करने पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. यह नियम रेसिडेंट और नॉन-रेसिडेंट इंडियन दोनों पर लागू होता है.
NDF क्या होता है?
NDF एक करेंसी ट्रेड है जिसका सेटलमेंट डॉलर में होता है लेकिन इसमें रुपए या डॉलर का फिजिकल एक्सचेंज नहीं होता है. इस फैसले से Offshore betting बंद होगा
NDF कॉन्ट्रैक्ट के तहत डॉलर और रुपए में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग होती है
असल में रुपए और डॉलर का एक्सचेंज नहीं होता है
सिर्फ दो करेंसी में जो प्राइस डिफरेंस होता है वह सेटल होता है
कंपनियों की तरफ से हेजिंग और Arbritage में इसका इस्तेमाल होता है.
RBI क्या चाहता है?
कुल मिलाकर रिजर्व बैंक का मकसद रुपए में केवल रियल हेजिंग को चालू रहने देना है. RBI नहीं चाहता है कि जियो पॉलिटिकल एंड मैक्रो इकोनॉमिक रिस्क के बीच वोलैटाइल करेंसी में सट्टेबाजी हो और यह रिस्क और बढ़ जाए.
ईरान युद्ध से अब तक रुपया 4% टूटा
जब से ईरान युद्ध शुरू हुआ है तब से रुपए में 4% से अधिक गिरावट आई है. युद्ध के कारण भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक (FIIs) की लगातार और भारी बिकवाली हो रही है. मार्च में FPI ने 11 बिलियन डॉलर से अधिक बिकवाली की जो किसी एक महीने में भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे अधिक है. क्रूड का भाव भी चढ़ रहा है. ये तमाम फैक्टर्स रुपए पर दबाव बना रहे हैं.
FY26 में रुपया 11% कमजोर हुआ
FY26 की बात करें तो रुपए में करीब 10-11% की गिरावट दर्ज की गई है. यह पिछले कई वित्त वर्ष में सबसे अधिक है. जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटिजिस्ट विजय कुमार ने कहा कि डोमेस्टिक और इंटरनेशनल, दोनों फैक्टर्स रुपए पर दबाव बना रहे हैं. क्रूड में तेजी से ट्रेड डेफिसिट बढ़ रहा है. रेमिटेंस पर भी असर दिख रहा है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली हो रही है. इंपोर्टर की तरफ से डॉलर की डिमांड बढ़ रही है. ये तमाम फैक्टर्स रुपए पर दबाव बना रहे हैं.
कोटक नियो ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रुपए में गिरावट का किन सेक्टर्स को फायदा और किन सेक्टर्स को नुकसान हो रहा है. इसके अलावा ये भी बताया गया है कि वो 5 प्रमुख फैक्टर्स कौन से हैं जो रुपए पर दबाव बना रहे हैं.
5 फैक्टर जो रुपए पर बना रहे हैं दबाव?
ईरान क्राइसिस के कारण क्रूड महंगा हो रहा है जिससे भारत का इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा है.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ रही है रुपए को डंप किया जा रहा है.
अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय हाई रहने की उम्मीद है जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत है. ग्लोबली डॉलर की डिमांड हाई.
भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ रहा और एक्सपोर्ट उतना नहीं है जिससे बढ़ता ट्रेड डेफिसिट रुपए पर दबाव बना रहा
फॉरेक्स मार्केट में Arbitrage और Speculation ट्रेड हाई है जिसपर RBI ने लगाम लगाया है
किन सेक्टर्स को फायदा और किसे नुकसान?
फायदा वाले सेक्टर्स
IT कंपनियां
फार्मा (एक्सपोर्टर)
टेक्सटाइल
जेम्स एंड ज्वैलरी
एग्रीकल्चर
आत्मनिर्भर मैन्युफैक्चरिंग
क्यों होगा फायदा?
एक्सपोर्ट करने से डॉलर में कमाई होगी और रुपया घटने से इनकी कमाई ज्यादा दिखेगी.
नुकसान वाले सेक्टर्स
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां
रिफाइनरीज
एविएशन
पेंट्स एंड केमिकल
इलेक्ट्रॉनिक्स
क्यों होगा नुकसान?
ये सेक्टर आयात पर निर्भर होते हैं जिसके कारण इंपोर्ट बिल बढ़ जाएगा.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 रुपए में अचानक इतनी मजबूती क्यों आई है?
RBI ने NDF बैन और NOP लिमिट का फैसला लिया है जिससे रुपए में सट्टेबाजी कम हुई और यह मजबूत हुआ.
Q2 NOP (Net Open Position) लिमिट क्या है?
रिजर्व बैंक ने बैंकों की फॉरेक्स पोजिशन पर कैप लगाय है जिससे Speculative ट्रेड्स पर कंट्रोल. इसे 100M डॉलर पर कैप किया है.
Q3 NDF (Non-Deliverable Forward) क्या होता है?
यह बिना करेंसी डिलिवरी वाला डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट है जिसमें वर्चुअली डॉलर सेटलमेंट होता है.
Q4 RBI ने NDF पर बैन क्यों लगाया?
इससे रुपए में ऑफशोर Speculative betting और Arbitrage पर रोक लगेगा.
Q5 क्या रुपए की मजबूती टिकेगी?
RBI के कदमों से शॉर्ट टर्म में रुपए को सपोर्ट जरूर मिलेगा लेकिन मीडियम टर्म में क्रूड का प्राइस और FII का एक्शन महत्वपूर्ण होगा.
