नई दिल्ली:– ईरान युद्ध ने कई इंडस्ट्रीज को हिलाकर रख दिया है. अब इसका असर एक ऐसी इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है, जो लाइफ़स्टाइल से जुड़ी हुई है. कंडोम बनाने वाली इंडस्ट्री में एक अजीब सी बेचैनी पैदा हो गई है.
कंडोम के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पेट्रो-केमिकल प्रोडक्ट, अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की सप्लाई में आई रुकावट के कारण अब इनकी क़ीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. इसका असर रीटेल सेल्स पर भी देखने को मिल सकता है.
इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक़, भारत के 8000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की इस इंडस्ट्री के सप्लायर्स की ओर से ऐसे पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं कि अमोनिया की कीमतों में 40-50 फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसकी वजह से सिलिकॉन ऑयल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.
इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी हिन्दी से कहा, “किसी ने नहीं सोचा था कि इस इंडस्ट्री में कोई दिक्कत आएगी, क्योंकि कंडोम अब एक लाइफ़ स्टाइल प्रोडक्ट बन चुका है और इसके ट्रेड का लोगों पर असर पड़ता है.”
लेटेक्स को स्टेबलाइज करने और अतिरिक्त प्रोटीन को हटाने के लिए अमोनिया का इस्तेमाल किया जाता है. सिलिकॉन तेल की कोटिंग कंडोम पर एक लुब्रिकेंट के तौर पर काम करती है.
लेकिन कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और उसकी वजह से रीटेल सेल्स पर इसका असर ही इस कड़ी का एकमात्र चिंताजनक पहलू नहीं है.
इंडस्ट्री में आई इस दिक्कत का असर उन लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है जो जनसंख्या और हेल्थ स्टडीज (जैसे परिवार नियोजन कार्यक्रम और एड्स नियंत्रण कार्यक्रम) से जुड़े हैं.
पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुतरेजा ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “बेहतर हेल्थ रिजल्ट हासिल करने के लिए गर्भनिरोधक तक पहुंच को मजबूत करना और गर्भनिरोध में पुरुषों की जिम्मेदारी को सामान्य बनाना बेहद ज़रूरी है. इसलिए, कंडोम की कमी या कीमतों में बढ़ोतरी से टीनएज प्रेग्नेंसी के मामलों में भी वृद्धि हो सकती है.”
