छत्तीसगढ़:- भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट गहराता जा रहा है. खमहरडीह इलाके में सुबह 9:45 बजे 4,500 लीटर का पानी का टैंकर महज सात मिनट में ही खाली हो गया. रहवासियों का कहना है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, स्थिति और भी बिगड़ती जा रही है.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट गहराता जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि टैंकर आते ही लोग टूट पड़ते हैं. शहर की कई बस्तियों में पीने के पानी के लिए रोज संघर्ष हो रहा है. रायपुर की ये तस्वीरें किसी सूखे इलाके की नहीं, बल्कि राजधानी के बीचों-बीच की हैं. जहां पानी अब जरूरत नहीं, बल्कि संघर्ष बन चुका है. यहां टैंकर आते ही लोग बर्तन लेकर दौड़ पड़ते हैं और कई बार हालात धक्का-मुक्की तक पहुंच जाते हैं.
रायपुर के चंगोराभाठा, खम्हारडीह, लाभांडी समेत कई ऐसे इलाके हैं, जहां हालात सबसे ज्यादा खराब है. घंटों इंतजार के बाद जब टैंकर पहुंचता है तो महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी पानी भरने के लिए लाइन तोड़ते नजर आते हैं. कई जगहों पर पाइपलाइन तो बिछी है, लेकिन पानी नहीं आता तो कहीं नलों में इतना कम प्रेशर है कि लोगों को टैंकर पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. टैंकर का इंतजार ऐसा कि लोग घर के बाहर बाल्टी और ड्रम लेकर बैठे रहते हैं. महिलाओं ने बताया कि सुबह से इंतजार करते हैं. टैंकर आता है तो धक्का-मुक्की हो जाती है. कई बार पानी भी नहीं मिल पाता.
टैंकर देख बर्तन लेकर भागे लोग
शहर के खम्हारडीह इलाके में टैंकर का इंतजार सुबह से लोग करते हैं. आज सुबह 9:45 मिनट पर जब टैंकर पहुंचा तो लोग टूट पड़े. देखते ही देखते 4500 लीटर टैंकर वाला पानी महज 7 मिनट में समाप्त हो गया. लोगों ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ जल संकट भी गहराता जा रहा है. आरोप है कि कई बार शिकायत के बाद भी स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा. हर किसी से शिकायत कर चुके हैं. वर्षों से उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है.
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष का आरोप
रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि शहर में ट्रिपल इंजन की सरकार है, लेकिन पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है. ये सरकार पानी भी लोगों को उपलब्ध नही करा पा रही है.. वही महापौर मीनल चौबे कहती हैं कि वर्तमान में जल संकट की स्थिति बनी है. निगम पूरी तरह से रात दिन एक कर पानी आपूर्ति की कोशिश में जुटी है. वहीं नगरीय प्रशासन मंत्री साव कहते हैं कुछ इलाकों में पेयजल की दिक्कत है. समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त राशि स्वीकृत की गई है. पानी संकट दूर करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम जारी. पिछले एक साल में पेयजल के लिए तेजी से काम किया गया.
फिलहाल शासन प्रशासन टैंकरों के जरिए सप्लाई बढ़ाने की बात कर रहे है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर कब तक राजधानी के लोग पानी के लिए यूं ही संघर्ष करते रहेंगे
