नई दिल्ली: – देश में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट और तमिलनाडु की पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाकों में दर्जनों मजदूरों की मौत ने फैक्ट्री सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर दिन औसतन 3 मजदूर फैक्ट्री हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं।
श्रम मंत्रालय से जुड़े FASLI की रिपोर्ट बताती है कि साल 2023 में फैक्ट्रियों में हुए हादसों में 1,090 मजदूरों की मौत हुई, जबकि 2,949 घायल हुए। वर्ष 2014 से 2023 के बीच कुल 11,108 मजदूरों की जान गई। रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा मौतें गिरने या फिसलने से 2,101 हुईं, जबकि मशीनों की चपेट में आने से 1,231, आग से 956, धमाकों से 924 और बिजली हादसों से 885 मौतें दर्ज की गईं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि देश की 3.34 लाख रजिस्टर्ड फैक्ट्रियों में से सिर्फ 34,450 में सेफ्टी पॉलिसी है, केवल 6,592 में सेफ्टी अफसर, 4,222 में मेडिकल अफसर और मात्र 2,272 फैक्ट्रियों में ऑन-साइट इमरजेंसी प्लान मौजूद है। यानी हादसा होने पर मजदूरों के बचने की संभावना भी बेहद कम रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि असली हालात इससे भी ज्यादा खराब हैं, क्योंकि देश के 90% मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जहां न रिकॉर्ड है और न सुरक्षा की कोई गारंटी।
