नई दिल्ली:–‘अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय के अमेरिकी दौरे के दौरान व्हाइट हाउस ने ट्रंप और किंग चार्ल्स की तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन लिखा—“Two Kings” यानी “दो राजा”। इसके बाद अमेरिका की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है कि क्या ट्रंप खुद को लोकतांत्रिक राष्ट्रपति नहीं, बल्कि “राजा” की तरह पेश करना चाहते हैं। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है और विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है।
विवाद तब और बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें दावा किया गया था कि ट्रंप और चार्ल्स दूर के रिश्तेदार हैं। इस पर ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह हमेशा से बकिंघम पैलेस में रहना चाहते थे और राजा-रानी से इस बारे में बात करेंगे। उनके इस बयान ने भी राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप पर “राजा जैसी छवि” बनाने के आरोप लगे हों। इससे पहले उन्होंने एआई से बने कई वीडियो साझा किए थे, जिनमें वह मुकुट पहने, शाही पोशाक में और ताकतवर शासक की तरह नजर आए थे। इन वीडियो को लेकर विपक्षी नेताओं ने कहा था कि ट्रंप लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं करते और खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं।
अमेरिका का इतिहास भी इस बहस को और संवेदनशील बनाता है, क्योंकि देश ने ब्रिटिश राजशाही से लड़कर ही आजादी हासिल की थी। 1776 में स्वतंत्रता की घोषणा करते समय अमेरिकी नेताओं ने राजशाही को अन्याय और तानाशाही का प्रतीक बताया था। ऐसे में राष्ट्रपति को “राजा” कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
डेमोक्रेट नेताओं ने कहा है कि अमेरिका में जनता सर्वोच्च है, कोई एक व्यक्ति नहीं। वहीं ट्रंप ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह राजा नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अगर मैं राजा होता, तो मैं आपसे बात नहीं कर रहा होता।” हालांकि इस बयान के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा और अमेरिका में लोकतंत्र बनाम व्यक्तिवाद की बहस फिर तेज हो गई है।
