नई दिल्ली:– पर्यावरण थिंक टैंक काउंसिल फॉर एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर’ यानी CEEW ने हाल ही में भारतीय मौसम को लेकर बेहद डराने वाली बात कही है। इनके अनुसार देश को हर साल ऐसे अतिरिक्त दिनों का सामना करना पड़ेगा जिसमें पारा सामान्य से ज्यादा रह सकता है।
इस रिपोर्ट में कई चीजों को लेकर चेताया गया है। इस रिपोर्ट की मानें तो भयंकर गर्मी बढ़ने से स्वास्थ्य पर गहरा असर दिखाई दे सकता है। साथ ही डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए ज्यादा रिसोर्स लगाने होंगे। इसमें दिन के साथ रातों के भी गर्म होने का अनुमान जताया गया है।
किस आधार पर लगाया गया यह अनुमान?
क्लाइमेट रेजिलियंस एनालिटिक्स एंड विजुअलाइजेशन इंटेलिजेंस सिस्टम की गणनाओं पर यह अनुमान आधारित है। ये एक एआई से चलने वाला एनवायरनमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफार्म है। इसने मौसम विभाग, आईआईटीएम और वन सर्वेक्षण से मिले तकरीबन चार दशक के आंकड़ों को देखते हुए तैयार किया गया है। जानिए CRAVIS क्या है-
गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा
इस रिपोर्ट की मानें तो भारत में आने वाले सालों में गर्मी का प्रकोप कम होता नहीं दिखाई दे रहा है बल्कि कहानी इसके उलट है। कई राज्यों में 30 दिनों तक गर्मी बढ़ सकती है। इसके साथ ही महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बारिश भी बढ़ जाएगी। इसके कारण मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
दिन के साथ वार्म नाइट भी करेगी परेशान
रिपोर्ट में यह साफ किया गया है कि गर्मी का यह आलम महज दिन को ही नहीं बल्कि रात में भी देखने को मिलेगा। हाल के समय में रातें दिन की अपेक्षा काफी ठंडी रहती हैं। यदि रात को भी मौसम गर्म होना शुरू हो जाएगा तो इससे लोगों की परेशानी बढ़ जाएगी। इसका सबसे बड़ा असर हेल्थ पर पड़ेगा।
CRAVIS के एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि भारत के 281 डेटा सेंटर्स में से आधे से ज्यादा डेटा केंद्र पहले से ही सालाना 90 दिनों से अधिक समय तक 35°C से ज्यादा तापमान के संपर्क में हैं। साल 2040 तक, लगभग 90 प्रतिशत डेटा केंद्रों को इसी तरह की गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। इससे कूलिंग की आवश्यकता और परिचालन लागत में काफी वृद्धि होगी।
इसके अलावा, दिल्ली में, गर्म रातों (20°C से ऊपर) की संख्या आज जो लगभग 180 दिनों की है, से बढ़कर अगले 25 सालों में 210 दिनों से अधिक होने का अनुमान है। जो कूलिंग की मांग में एक अतिरिक्त महीने के बराबर है, जिसका प्रभाव बिजली की अधिकतम खपत और सालाना खपत दोनों पर पड़ेगा।
क्या बोले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री?
पीयूष गोयल ने अपने मुख्य भाषण में कहा , ‘कल रात अप्रैल की सबसे गर्म रातों में से एक थी। बढ़ते तापमान, बढ़ते गर्म दिन और लगातार भारी बारिश की घटनाएं इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि जलवायु परिवर्तन भारत के लिए एक वास्तविकता है, जो हमारी अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है। पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत ने जलवायु परिवर्तन को केवल एक दायित्व नहीं बल्कि आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए काम किया है। आगे चलकर, कंपनियों के बोर्डरूम को अपने मुख्य निर्णय लेने में जलवायु जोखिमों को ध्यान में रखना होगा।
पीयूष गोयल ने आगे कहा, मुझे CEEW के AI-संचालित जलवायु सूचना मंच CRAVIS को लॉन्च करते हुए खुशी हो रही है, जो सार्वजनिक जलवायु सूचना के क्षेत्र में भारत की ओर से विश्व के लिए एक योगदान हो सकता है। यह भारत के बढ़ते डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जिसने पहले ही UPI, ONDC, वैक्सीन मैत्री जैसी कई सफल पहलों को जन्म दिया है। मुझे उम्मीद है कि कंपनियां CRAVIS जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग निवेश को निर्देशित करने, जोखिमों का आकलन करने और प्रत्येक चुनौती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य अवसर में बदलने के लिए करेंगी।
