छत्तीसगढ़ :– महासमुंद जिले में एलपीजी गैस की बड़ी हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। यहां जब्त किए गए गैस से भरे 6 कैप्सूल ट्रकों से करीब 90 मीट्रिक टन एलपीजी गायब कर दी गई। इस गैस की कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस खुलासे के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
सुरक्षित रखरखाव के नाम पर हुई हेराफेरी
मामला थाना सिंघोड़ा क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सुरक्षा कारणों से जब्त किए गए 6 एलपीजी कैप्सूल ट्रकों को उरला (अभनपुर) स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल को सुरक्षित रखने के लिए सौंपा गया था।
लेकिन इसी दौरान आरोपियों ने भरोसे का गलत फायदा उठाते हुए गैस की चोरी शुरू कर दी। सुपुर्दनामे के बाद ही यह पूरा खेल रचा गया, जो धीरे-धीरे बड़े घोटाले में बदल गया।
सुनियोजित तरीके से निकाली गई गैस
जांच में सामने आया कि यह कोई सामान्य चोरी नहीं थी, बल्कि पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया अपराध था। कंपनी के मालिक, डायरेक्टर और प्लांट मैनेजर ने मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। 31 मार्च से 6 अप्रैल के बीच कैप्सूलों से गैस को धीरे-धीरे खाली किया गया ताकि किसी को शक न हो। बाद में इस गैस को अवैध रूप से बाजार में बेचा गया।
कर्मचारियों के बयान से खुला राज
पूछताछ के दौरान प्लांट में काम कर रहे कर्मचारियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह काम कंपनी प्रबंधन के निर्देश पर किया था।
दस्तावेजों से छेड़छाड़, रिकॉर्ड गायब
मामले को छुपाने के लिए आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों में हेरफेर की। बिना बिल वाले लेन-देन का रजिस्टर गायब कर दिया गया और बाद में कैप्सूलों का वजन कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। यह भी सामने आया कि सुपुर्दनामे के बाद कैप्सूल का समय पर वजन नहीं कराया गया, जिससे लंबे समय तक इस गड़बड़ी का पता नहीं चल पाया।
रायपुर की एजेंसियां भी जांच के दायरे में
इस घोटाले में रायपुर की कुछ एजेंसियों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि इन एजेंसियों ने चोरी की गैस खरीदकर उसे बाजार में खपाने में मदद की। पुलिस अब इन एजेंसियों के नेटवर्क की जांच कर रही है और पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।कर्मचारियों के इन बयानों से यह साफ हो गया कि यह घटना किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी टीम की मिलीभगत से की गई थी।
महंगे दामों पर बेची गई गैस
जांच में यह भी सामने आया कि चोरी की गई एलपीजी गैस को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा गया। कई मामलों में इसकी कीमत सामान्य दर से डेढ़ से दो गुना तक वसूली गई। इस अवैध कारोबार के लिए आरोपियों ने कच्चे बिल और अलग रजिस्टर का उपयोग किया, जिससे लेन-देन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सामने न आए।
