मध्य प्रदेश:- राज्यसभा की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. दिल्ली में एमपी कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने बड़ी बैठक की है. जिसमें राज्यसभा चुनाव की रणनीति बनी है.
मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान कभी भी हो सकता है. ऐसे में भोपाल से लेकर दिल्ली तक चल हलचल तेज हो गई है. इस बीच एमपी कांग्रेस की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है. जिसमें पार्टी के दिग्गजों ने बड़ा मैसेज दिया है. दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के बीच बड़ी बैठक हुई है. जिसमें एमपी कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी भी शामिल थे. यह बैठक राज्यसभा चुनाव के लिहाज से अहम मानी जा रही है. क्योंकि हाल के दिनों में एमपी के सियासी समीकरण जमकर बदले हैं. ऐसे में राज्यसभा चुनाव को लेकर एमपी कांग्रेस अलर्ट मोड पर नजर आ रही है.
राज्यसभा चुनाव की रणनीति
मध्य प्रदेश में खाली होने वाली राज्यसभा की तीन सीटों में से एक सीट पर कांग्रेस को जीत मिल सकती है. ऐसे में पार्टी के सीनियर नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है. बताया जा रहा है कि चारों दिग्गजों के बीच हुई बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनी है. जिसमें ये सभी नेता विधायकों के मन टटोलेंगे और आगे की रणनीति पर काम करेंगे. पार्टी उन विधायकों पर नजर रखेगी जो चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं. इसके अलावा अलग-अलग खेमों के विधायकों को भोपाल बुलाकर बातचीत की जाएगी. ताकि किसी तरह से टूट की स्थिति न बने.
कांग्रेस बनाएगी एक नाम पर सहमति
कांग्रेस एमपी में राज्यसभा सीट के लिए पार्टी में किसी ऐसे चेहरे पर सहमति बनाना चाहती है जिस पर सभी विधायक एकजुट रहे. हालांकि राज्यसभा उम्मीदवार के नाम को लेकर अलाकमान पर अंतिम फैसला छोड़ा गया. लेकिन इस फैसले में राज्य के नेताओं की राय अहम मानी जा रही है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा जाने से इंकार कर दिया है. ऐसे में पार्टी उनकी जगह अब सबसे सीनियर कमलनाथ के नाम पर भी विचार कर सकती है. क्योंकि पार्टी ऐसा नाम सामने लाना चाहती है. जिस पर सभी की स्वीकार्यता हो.
कांग्रेस को एक-एक विधायक जरूरी
दरअसल, एमपी में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कांग्रेस को अपना-अपना एक विधायक जरूरी है. मध्य प्रदेश में 230 विधायक हैं. ऐसे में तीन राज्यसभा सीटों के हिसाब से एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की जरुरत पड़ेगी. 164 विधायकों के दम पर बीजेपी दो सीटें आसानी से जीतेगी. जबकि कांग्रेस को अपनी एक सीट बचाने के लिए 58 विधायकों की जरुरत पड़ेगी. आंकड़ों के मुताबिक 64 विधायक हैं. क्योंकि दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है. उनका मामला कोर्ट में है. जिस पर सुनवाई 29 जुलाई को होनी है. उससे पहले राज्यसभा चुनाव हो जाएगा. वहीं एक और विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर असमंजस बरकरार है.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर कांग्रेस के 6 विधायक यहां से वहां होते हैं. बीजेपी को एक सीट जीतने के लिए 58 विधायक चाहिए. इस हिसाब से दो सीटें वह आराम से जीत सकती है. उसके बाद भी भाजपा के पास 49 विधायक बचते हैं. ऐसे में भाजपा अगर तीसरा प्रत्याशी भी खड़ा करती है तो मध्य प्रदेश में राज्यसभा का चुनाव के समीकरण बदल सकते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव को लेकर समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं.
