छत्तीसगढ़ :– न्यायधानी बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (GGU) में जारी एक आदेश ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। वीर सावरकर बालक छात्रावास के अधीक्षक द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि परीक्षा समाप्त होने के 48 घंटे के भीतर छात्रों को हॉस्टल खाली करना होगा। साथ ही छात्रों को अपनी पूरी सामग्री अपने साथ ले जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस आदेश के सामने आने के बाद खासकर दूसरे जिलों और राज्यों से पढ़ने आए छात्रों में असमंजस और नाराजगी का माहौल है। छात्रों का कहना है कि अचानक हॉस्टल खाली करने और पूरा सामान साथ ले जाने की व्यवस्था उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
जानकारी के मुताबिक यह आदेश चीफ वार्डन और असिस्टेंट वार्डन की सहमति से जारी किया गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान छात्रावास छोड़ते समय सभी छात्र अपनी समस्त सामग्री अपने साथ ले जाएंगे। इसके अलावा कमरे का ताला खोलकर केयरटेकर से कमरे में उपलब्ध सामग्री का सत्यापन कराना होगा और मेस वेंडर से ‘नो ड्यूज’ लेने के बाद ही हॉस्टल छोड़ना होगा। दूसरे पत्र में कहा गया है कि छात्रावास नियमों के अनुसार परीक्षा समाप्त होने के 48 घंटे के भीतर छात्रों को कमरा खाली करना अनिवार्य होगा।
इस आदेश के बाद सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्रों को हो रही है, जिनका घर दूर-दराज के जिलों या दूसरे राज्यों में है। कई छात्रों ने बताया कि उनके पास बिलासपुर में सामान रखने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। यदि सभी दोस्त भी हॉस्टल में रहने वाले हों और शहर में कोई परिचित न हो, तो सामान सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाएगा। छात्रों का कहना है कि परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद हर किसी को टिकट मिलना संभव नहीं होता। कई बार ट्रेन और बस की बुकिंग बाद की तारीखों में होती है, ऐसे में 48 घंटे के भीतर हॉस्टल खाली करना मजबूरी बन जाता है।
कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं, इंटरव्यू और अन्य शैक्षणिक कार्यों के कारण उन्हें परीक्षा खत्म होने के बाद भी कुछ दिन शहर में रुकना पड़ता है। ऐसे में अचानक हॉस्टल छोड़ने का आदेश उनके लिए अतिरिक्त तनाव पैदा कर रहा है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि कम से कम अस्थायी रूप से कॉमन रूम या स्टोर रूम की व्यवस्था की जाए, ताकि छात्र अपना सामान सुरक्षित रख सकें।
छात्रों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुविधा और सुरक्षा देना होना चाहिए, न कि उन्हें परेशानियों में डालना। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और दूर-दराज से आने वाले छात्रों की समस्याओं को समझते हुए राहत देने की मांग की है। फिलहाल इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन छात्रों में इस आदेश को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
