नई दिल्ली:– पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक कूटनीतिक हलचलों के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची इस सप्ताह भारत दौरे पर आ सकते हैं। वे नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। भारत इस वर्ष ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है और सितंबर 2026 में प्रस्तावित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों को लेकर यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
जयशंकर और अराघची के बीच हो सकती है अहम द्विपक्षीय वार्ता
सूत्रों के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अब्बास अराघची के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है। दोनों नेताओं के बीच हाल के महीनों में कई बार टेलीफोन पर बातचीत हो चुकी है, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान पर हुए हमलों जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली मुलाकात में क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीतिक सहयोग पर विशेष फोकस रहेगा।
BRICS देशों से सहयोग बढ़ाने पर जोर देगा ईरान
ईरान लगातार ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ रणनीतिक समन्वय मजबूत करने की वकालत करता रहा है। ईरानी विदेश मंत्री पहले भी यह कह चुके हैं कि उनका देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में दिल्ली की बैठक ईरान के लिए वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का बड़ा अवसर मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ब्रिक्स देशों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत-ईरान संबंधों को मिलेगा नया आयाम
अब्बास अराघची इससे पहले मई 2025 में आधिकारिक दौरे पर भारत आए थे। वह उनके कार्यभार संभालने के बाद पहली भारत यात्रा थी। उस दौरान भारत-ईरान मैत्री संधि की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।उन्होंने भारत-ईरान संयुक्त आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता भी की थी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की थी।
सितंबर में होने वाले BRICS Summit की तैयारी तेज
नई दिल्ली में आयोजित होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक को सितंबर 2026 में प्रस्तावित 18वें BRICS Summit की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। इस बैठक में सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
