नई दिल्ली:– मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार उन्नत और आधुनिक बनाने की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार की विशेष प्राथमिकताओं के चलते प्रदेश में महिला एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है।
सरकार द्वारा आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र को मजबूत किए जाने से नवजात शिशुओं की जान बचाने में बड़ी सफलता मिल रही है।
उपचार क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि और बिस्तरों का विस्तार
प्रदेश में जन्म के समय कम वजन वाले, समय पूर्व जन्मे और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के बेहतर इलाज के लिए संचालित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (SNCU) की उपचार क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जहां 1 लाख 29 हजार 212 नवजात शिशुओं को उपचार प्रदान किया गया था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 34 हजार 410 तक पहुंच गई है। इसके साथ ही शासन द्वारा आईसीयू केयर यूनिट्स में बिस्तरों की संख्या को 1654 से बढ़ाकर 1770 कर दिया गया है, जिससे अधिक संख्या में गंभीर शिशुओं को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल पा रहा है।
राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन और शानदार डिस्चार्ज दर
हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य में संचालित 62 एसएनसीयू (SNCU) में 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक कुल 15 हजार 54 नवजात शिशुओं को उपचारित किया गया, जिनमें से 12 हजार 818 शिशुओं को सफलतापूर्वक ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया। यहाँ की डिस्चार्ज दर 85.2 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इसके अलावा लामा (LAMA) दर मात्र 2.12 प्रतिशत, रेफरल दर 4.2 प्रतिशत और मृत्यु दर घटकर 8.29 प्रतिशत पर आ गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति को दर्शाती है।
“जीरो सेपरेशन” और “मातृ दुग्ध बैंक” जैसी अभिनव पहल
शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए राज्य में भारत सरकार के दिशा-निर्देशानुसार एमएनसीयू (मदर एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) की अवधारणा का विस्तार किया गया है। वर्तमान में संचालित 23 एमएनसीयू इकाइयां “जीरो सेपरेशन” सिद्धांत पर काम कर रही हैं, जहां मां और नवजात को अलग नहीं किया जाता, जिससे कंगारू मदर केयर और स्तनपान को बढ़ावा मिलता है।इसके साथ ही, इंदौर और भोपाल में क्रियाशील दो मातृ दुग्ध इकाइयों (CLMC) के माध्यम से वर्ष 2025-26 में 1,031 स्वैच्छिक माताओं द्वारा 241.6 लीटर दूध दान किया गया।
डिजिटल नवाचार: ‘ई-शिशु परियोजना’ से सुधरे हालात
स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक का समावेश करते हुए प्रदेश में ‘ई-शिशु परियोजना’ का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। दिसंबर 2025 से अब तक इस परियोजना से कुल 9,889 नवजात शिशु लाभान्वित हो चुके हैं। इंदौर और उज्जैन संभाग की 16 एसएनसीयू स्पोक इकाइयों में इस डिजिटल नवाचार के बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं, जहाँ विशेषज्ञ मार्गदर्शन के चलते औसत रेफरल दर 5% से घटकर 4% और मृत्यु दर 8% से घटकर मात्र 6 प्रतिशत रह गई है।
