मध्यप्रदेश:– धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस संगठन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर हाई कोर्ट के हालिया आदेश के बाद भोजशाला से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संगठन ने भोजशाला को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार से विशेष पहल करने का आग्रह किया है।
भोजशाला मामले के मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में न्यायालय द्वारा भोजशाला को मां सरस्वती मंदिर के रूप में मान्यता मिली है। उन्होंने इसे हिंदू समाज की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि अब भोजशाला में पूजा-अर्चना शुरू हो चुकी है।
भारत लाई जाए मां वाग्देवी की प्रतिमा
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस संगठन ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की है कि ब्रिटिश संग्रहालय, लंदन में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास तेज किए जाएं और उसे पुनः भोजशाला परिसर में स्थापित किया जाए। संगठन का कहना है कि यह प्रतिमा भारतीय संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसके अलावा पत्र में भोजशाला परिसर में ‘मां सरस्वती लोक’ विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि इस स्थान को धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। संगठन का मानना है कि इससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर की मांग
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मांडू, धार, अमझेरा और इंदौर को जोड़ते हुए धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर विकसित करने की मांग भी सरकार के सामने रखी है। उनका कहना है कि इससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। संगठन ने भोजशाला परिसर में वैदिक संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इससे वेद, संस्कृत और भारतीय संस्कृति के अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।
स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों
इसके साथ ही संगठन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ समन्वय बनाकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि दर्शन और पूजा व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
