नई दिल्ली:– ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के भाषण के दौरान जमकर हंगामा और नारेबाजी की गई। कार्यक्रम के दौरान वहीं मौजूद कुछ लोगों द्वारा उनके पुराने बयान को लेकर तीखे सवाल पूछे गए। इससे वहां बहस छिड़ गई। इसके बाद कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की गई। घटना की लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा कड़ी निंदा की गई है। उच्चायोग ने इसे अमर्यादित बताया।
CJI के पुराने बयान पर हुआ बवाल
CJI सूर्यकांत छह दिवसीय ब्रिटेन के दौरे पर हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के बर्कबेक कॉलेज में एआई और इंटरनेशनल लॉ विषय पर लेक्चर दे रहे थे। लेक्चर खत्म होने के बाद सवाल-जवाब के दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हो रहा है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति द्वारा भारत के लोकतांत्रिक माहौल और असहमति पर सवाल उठाने की कोशिश की।
इसी दौरान CJI की कुछ पुराने टिप्पणी का भी सवाल किया गया। इस पर कार्यक्रम के आयोजकों ने सवाल को मुख्य विषय से अलग बताते हुए व्यक्ति को बीच में ही रोक दिया। इससे वहां का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।
भारतीय उच्चायोग का जवाब
घटना की जानकारी देते हुए भारतीय उच्चायोग ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया। पोस्ट में उच्चायोग ने लिखा, 4 जून, 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश ने आयोजकों के निमंत्रण पर यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, बर्कबेक में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेशनल लॉ’ पर लेक्चर देने के लिए एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
उनके भाषण के बाद सवाल-जवाब भी किया गया। इसी बीच एक व्यक्ति द्वारा कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की गई। घटना पर उच्चायोग ने कहा कि दर्शकों का ऐसा अशोभनीय व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। यह उस सम्मानजनक बातचीत के भी खिलाफ है जो सार्वजनिक चर्चा का आधार होनी चाहिए। लोकतांत्रिक समाज में विचारों का अलग-अलग होना स्वाभाविक है। हालाकि, उन्हें सभ्य और सम्मानजनक तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए।
CJI का भाषण
CJI सूर्यकांत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि कोई भी तकनीकि अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती। यह इस बात पर तय होता है कि समाज में इसका इस्तेमाल कैसे होता है। उन्होंने बताया कि कानून किसी नई तकनीक को रोकता नहीं है, बल्कि उसके तकनीकी ताकत का संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा के प्रति जवाबदेही को देखना है।
