नई दिल्ली:– मुंबई में मानसून की रफ्तार धीमी है और दिल्ली बदलते मौसम से जूझ रही है। देश का एक बड़ा हिस्सा आज मौसम ऐप और मौसम विज्ञान विभाग के बुलेटिन खंगाल रहा है। लेकिन मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के गांवों में कहानी बिल्कुल अलग है। यहां के किसान आसमान के बजाय जमीन की ओर देख रहे हैं, जहां टिटहरी नाम का एक छोटा सा पक्षी सदियों पुरानी परंपरा के साथ मानसून की भविष्यवाणी कर रहा है।
टिटहरी के 4 अंडे और मानसून के 4 महीने
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, टिटहरी के अंडे आगामी मानसून की तीव्रता और पैटर्न का सटीक संकेत देते हैं। यह पक्षी आमतौर पर चार अंडे देता है, जिन्हें ग्रामीण बुजुर्ग मानसून के चार महीनों से जोड़कर देखते हैं। हर एक अंडे की स्थिति यह तय करती है कि उस विशेष महीने में कितनी बारिश होगी।
विंध्य के किसान अंशुमन सिंह बताते हैं कि यह कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से सहेजा गया पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान है। पूर्वजों ने लंबे समय तक पशु-पक्षियों के व्यवहार को करीब से देखकर इस विज्ञान को विकसित किया है।
घोंसले की ऊंचाई से तय होती है बाढ़
अंडों के अलावा टिटहरी किस जगह को चुन रही है, यह सबसे महत्वपूर्ण है। अगर टिटहरी किसी ऊंचे बांध या ऊंचे स्थान पर अंडे देती है, तो ग्रामीण इसे भारी बारिश और बाढ़ का संकेत मानते हैं। माना जाता है कि पक्षी को प्राकृतिक रूप से पानी बढ़ने का अहसास हो जाता है और वह अंडों को सुरक्षित रखने के लिए ऊंचाई चुनती है। इसके विपरीत, निचले इलाकों में अंडे देने का मतलब कमजोर मानसून माना जाता है।
आकार और दिशा का रहस्य
टिटहरी के अंडों का नुकीला सिरा अगर नीचे की ओर हो, तो मूसलाधार बारिश की संभावना बढ़ जाती है। अंडों की दिशा से हवाओं के रुख और मानसून के आने के रास्ते का भी अनुमान लगाया जाता है। सतना, रीवा, सीधी, सिंगौली और पन्ना के खुले खेतों और नदियों के किनारे पाए जाने वाले ये पक्षी पारंपरिक खेती का आज भी एक अहम हिस्सा बने हुए हैं।
