नई दिल्ली:– अमेरिका-ईरान शांति समझौते को अपनी कूटनीतिक सफलता बताने वाले पाकिस्तान को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए बड़ा बयान दिया है।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह तारीफ नहीं बल्कि आलोचना है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक पॉडकास्ट में कहा कि समझौते का पूरा टेक्स्ट सार्वजनिक करने में देरी की एक वजह पाकिस्तान और कतर जैसे देशों में प्रेस की स्वतंत्रता का अभाव भी था। वेंस ने कहा कि अमेरिका चाहता था कि समझौते के दस्तावेज जल्द जनता के सामने आएं ताकि लोग उन्हें पढ़ सकें और सवाल पूछ सकें, लेकिन पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में ऐसी पारदर्शिता की परंपरा नहीं है।
जेडी वेंस ने कहा कि पाकिस्तान में अमेरिकी संविधान के “फर्स्ट अमेंडमेंट” जैसी व्यवस्था नहीं है, जो अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में किसी भी महत्वपूर्ण समझौते की जानकारी जनता के सामने रखना सामान्य प्रक्रिया है, जबकि पाकिस्तान में नागरिकों को ऐसी पारदर्शिता कम देखने को मिलती है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जून को ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौते की घोषणा की थी, लेकिन उसका पूरा दस्तावेज दो दिन बाद सार्वजनिक किया गया। इस देरी को लेकर अमेरिका में विपक्ष और कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे। बाद में समझौते का पूरा टेक्स्ट जारी किया गया।
वेंस के बयान के बाद पाकिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भी पाकिस्तान की स्थिति लंबे समय से कमजोर मानी जाती रही है। वहीं, अमेरिका-ईरान समझौते में मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान ने इसे अपनी बड़ी विदेश नीति उपलब्धि बताया था, लेकिन बाद के घटनाक्रम ने उसके दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए। ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हस्ताक्षर समारोह नहीं होगा, जबकि दोनों देशों के नेताओं ने डिजिटल माध्यम से ही समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।
