नई दिल्ली:– मूंग बाजार की सबसे बड़ी चर्चा मध्यप्रदेश में संभावित एमएसपी खरीद को लेकर चल रही है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादक राज्य है और व्यापारिक सूत्रों के अनुसार सरकारी खरीद जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू हो सकती है।
हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बाजार में खरीद की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुओं है। सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर मूंग खरीद की सीमा 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने का अनुरोध किया है। वर्तमान खरीद सीमा किसानों के लिए अपर्याप्त मानी
व्यापारिक हलकों में चर्चा है कि केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को सिद्धांत रूप से स्वीकार कर लिया है, लेकिन आधिकारिक आदेश का इंतजार किया जा रहा है। बाजार की नजरें अब इसी घोषणा पर टिकी हुई हैं। खरीफ मूंग की बोवनी को लेकर किसानों की अभी भी चिंतित है। गुजरात और राजस्थान के कई प्रमुख मूंग उत्पादक क्षेत्रों में अभी तक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, जिससे बोवनी की गति प्रभावित हो सकती है। दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में प्री-मानसून वर्षा के बाद किसानों ने मूंग की बोवनी कर दी थी, लेकिन उसके बाद लंबे शुष्क मौसम ने फसल को जोखिम में डाल दिया है। यदि शीघ्र वर्षा नहीं होती हैं तो पहले से बोई गई फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
सरकारी बिक्री का सीमित प्रभाव
मध्यप्रदेश मार्कफेड के बड़े टेंडर अब बंद हो चुके हैं। वहीं एनसीसीएफ और नाफेड कुछ राज्यों में वर्ष 2023 और 2024 की मूंग की बिक्री कर रहे हैं, लेकिन उपलब्ध मात्रा इतनी अधिक नहीं है कि बाजार पर कोई बड़ा दबाव बना सके। आने वाले समय में मूंग बाजार की दिशा मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करेगी-पहला मध्यप्रदेश की एमएसपी खरीद नीति और दूसरा मानसून की प्रगति एवं खरीफ मूंग बोवनी की स्थिति पर। निर्यात मांग फिलहाल मजबूत और स्थिर बनी हुई है, इसलिए यह बाजार के लिए सहायक कारक बना हुआ है।
मूंग बाजार की मौजदा बुनियाद मजबूत बनी हुई है। ऊंचा एमएसपी पर संभावित सरकारी खरीद और निरंतर निर्यात मांग बाजारों को समर्थन प्रदान कर रहे है। हालांकि आने वाले सप्ताहों में मध्यप्रदेश की खरीद नीति तथा देशभर में मानसून और बोवनी की प्रगति पर विशेष नजर रखना आवश्यक होगा, क्योंकि यहीं कारक आगे के मूल्य रुझान को निर्धारित करेंगे। मूंग व्यवसायी राहुल व्होरा का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह से मूंग की सरकारी खरीदी शुरू होती है तो बाजार में कुछ तेजी की स्थिति बन सकती है। कुल मिलाकार बेस्ट क्वालिटी की मूंग में मंदी के आसार कम है। काबुली चने में कारोबार सामान्य रहा। भाव में कोई खास परिवर्तन नहीं रहा। अन्य दाल-दलहन में भी कामकाज सीमित रहने से भाव स्थिर रहे।
कंटेनर में नया काबुली (डैलर) चना 42/44 9600, 44/46 9300, 50/52 8150, 58/60 7300, 60/62 7100, 85/80 6100 रुपये क्विंटल भाव रहे।
दलहन- चना कांटा 6050, विशाल चना 5900-5950, काबुली डॉलर 7200-8600, काबुली रशियन 5800, बिटकी 5200-5300, मसूर 6000, तुवर महाराष्ट्र सफेद 7300-7400, महाराष्ट्र लाल 7600-7800, कर्नाटक नई 8000-8200 निमाड़ी तुवर 6500-7300, मूंग बेस्ट गर्मी 7300-7500, बेस्ट 7600-7800, मीडियम 7400-7700, मोगर 5500-6500, उड़द बोल्ड 8800-9100, उड़द गर्मी 8000-8500, ग्रेविटी क्लीन 8800-9100, हलका 4000-6000 रुपये प्रति क्विंटल।
दालों के दाम- चना दाल 7400-7500, मीडियम 7600-7700, बेस्ट 7900-8100, मसूर 6800-6900, बेस्ट 7000-7100, मूंग दाल 8700-8800, बेस्ट 8900-9000 मूंग मोगर 10100-10200, बेस्ट 10400-10600, तुवर दाल 7100-7300, मीडियम 8300-8500, बेस्ट 9700-9900, ए.बेस्ट 10700-10800, ब्रांडेड तुवर दाल 121़00, उड़द दाल 9900-10100, बेस्ट 10200-10300, उड़द मोगर 10800-11100 बेस्ट 11300-11500, रुपये प्रति क्विंटल के भाव बोले गए।
इंदौर चावल भाव- दयालदास अजीतकुमार छावनी के अनुसार बासमती (921) 12000-13000, तिबार 10500-11500, बासमती दुबार पोनिया 9500-10000, मिनी दुबार 8000-8500, मोगरा 5000-7000, बासमती सेला 7500-9500 कालीमूंछ डिनरकिंग 9000, राजभोग 7500, दुबराज 4500-5500, परमल 3400-3500, हंसा सेला 3500-3700, हंसा सफेद 2900-3100, पोहा 4500-5100 रु. क्विंटल।
