नई दिल्ली:– पीएम नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली कैबिनेट में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। संसद की मानसून सत्र और कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय कैबिनेट में अहम बदलाव का उम्मीद की जा रही है। ये कैबिनेट विस्तार कब हो सकता है, किन चेहरों को नए कैबिनेट में जगह मिलेगा और किसे मंत्रिमंडल से बाहर जाना होगा, ये प्रश्न सभी के मन में चल रहा है। आइए इन सभी सवालों का जबाव विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।
सरकार के करीबी सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 20 जूलाई के आसपास शुरू होने वाले संसद के मानसूत्र के बीच कैबिनेट विस्तार हो सकता है। वहीं, कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि अगर मानसून सत्र के पहले मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं होता है तो सितंबर या अक्टूबर में होने की संभावना है।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर सरकार की नजर
सूत्रों की माने तो इस समय सरकार का पूरा फोकस ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और परिसीमन जैसे अहम बिलों को पास कराने पर है। गौरतलब है कि एनडीए की नेतृत्व वाली सरकार के पास राज्यसभा और लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं है, इसलिए अंदरुनी कलह से बचने के लिए कैबिनेट विस्तार को सितंबर और अक्टूबर के बीच टाला जा सकता है।
किन कैबिनेट मंत्रियों का कटेगा पत्ता?
राजनीतिक जानकारों की माने तो कैबिनेट विस्तार में मंत्रियों के आकलन का मुख्य आधार उनका प्रदर्शन रहने वाला है। उनके कामकाज पर ही उनका मूल्यांकन होगा। 21 मई को हुई बैठक में इसकी समीक्षा की जा चुकी है। इसके साथ ही कुछ अन्य कारण भी जिसकी वजह से मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। ऐसा कहा जा रहा है कि हाल ही में नीट हुए नीट पेपर लीक का भी असर देखने को मिल सकता है।
नीट पेपर लीक और सीबीएसई के डिजिटल मार्किंग सिस्टम में कथित गड़बड़ियों की बीच एजेकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान का भविष्य भी खतरे में माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी नए अध्यक्ष नितिन नबीन की लीडरशिप में युवाओं पर विशेष ध्यान रख रही है। मौजूदा समय में 70 से 80 साल की उम्रवाले 8 मंत्रियों को भी कैबिनेट से बाहर जाने के डर सत्ता रहा हा है।
महिला, युवा और OBC को तवज्जो
गौरतलब है कि हाल ही में बीजेपी ने केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष का कारभार सौंपा है। ऐसे में पार्टी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति के तहत इन दोनों मंत्रियों को कैबिनेट बर्थ छोड़ना पड़ सकता है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का ऐसा मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और कुर्मी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए पंकज चौधरी को कैबिनेट में बने रहने की संभावना है।
नए कैबिनेट में किसे मिल सकता है मौका?
2027 में यूपी, उत्तराखंड और पंजाब समेत कुल 7 राज्यों में विधानसभा का चुनाव है। ऐसे में नए कैबिनेट में इन राज्यों से अधिक प्रतिनिधित्व देखने को मिल सकता है। इसके अलावा साल 2029 से लागू होने वाले 33 प्रतिशत महिला आरक्षण और जातिगत जनगणना की मागं के बीच नए मंत्रिमंडल में महिला, युवा और ओबीसी को अधिक जगह मिलने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार में कुछ पूर्व नौकरशाहों को भी मंत्री बनाया जा सकता है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास के नाम को लेकर काफी चर्चा है। वहीं, बंगाल में मिली बड़ी जीत के बाद पार्टी कुछ स्थानीय सांसदों को इनाम के तौर पर मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है।
बागी सांसदों के नाम पर भी चर्चा
इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों और शिवसेना यूबीटी से टूटकर एकनाथ शिंदे गुटे में आए नेताओं में से किसी को कैबिनेट में जगह मिल सकता है, बशर्ते दल-बदल कानून के तहत स्पीकर का फैसला उनके पक्ष में आए। आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर बीजेपी में आए 7 राज्यसभा सांसदों में से भी एक-दो चेहरों को मौका मिल सकता है।
