मध्यप्रदेश:- पहली बार वक्फ बोर्ड के गठन को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है. राज्य सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को इसमें शामिल किया है. इंदौर के मनोज मालपानी और गुना जिले के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को बोर्ड का सदस्य बनाया गया है. वहीं, सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. सरकार का कहना है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के तहत गठित यह नया बोर्ड देश में अपनी तरह का पहला बोर्ड है, जिसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है.
नए वक्फ बोर्ड में कुल 10 सदस्य शामिल किए गए हैं. पहले वक्फ अधिनियम-1995 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड में केवल मुस्लिम समुदाय के लोगों को ही सदस्य बनाया जाता था. राज्य सरकार कुछ सदस्यों को नामित जरूर करती थी, लेकिन उनके लिए भी मुस्लिम होना अनिवार्य था. अब 2025 में हुए संशोधन के बाद नियम बदले हैं. नए प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना जरूरी कर दिया गया है. इसी व्यवस्था के तहत मध्यप्रदेश में यह नई पहल की गई है.
नए बोर्ड के गठन की घोषणा की
राज्य शासन की ओर से 4 जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश राजपत्र में जारी अधिसूचना के जरिए नए बोर्ड के गठन की घोषणा की गई. यह गठन वक्फ अधिनियम की धारा 13(1) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए किया गया है. सरकार का दावा है कि संशोधित कानून के अनुसार बोर्ड का गठन करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है. इस कदम को वक्फ संस्थाओं के प्रशासन में व्यापक भागीदारी और नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री का नाम बरकरार
पूर्व केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला का नाम भी बोर्ड में बरकरार रखा गया है. उनकी नियुक्ति नए चयन के बजाय पहले से चल रहे कार्यकाल के आधार पर बनी रहेगी. उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक प्रभावी रहेगा. इसी तरह केंद्रीय वक्फ परिषद में भी दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है. राज्य सरकार का कहना है कि नए बोर्ड के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के संचालन, निगरानी और प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता लाई जाएगी तथा सुशासन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा.
कैसे काम करता है वक्फ बोर्ड ?
वक्फ ऐसी संपत्ति को कहा जाता है, जिसे कोई मुस्लिम व्यक्ति या संस्था धार्मिक, शैक्षणिक या समाजसेवा के उद्देश्य से स्थायी रूप से दान कर देती है. इसमें मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाह, ईदगाह, मदरसे, धर्मार्थ भवन और जमीन जैसी संपत्तियां शामिल होती हैं. वक्फ बोर्ड का मुख्य काम इन संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करना, उनका संरक्षण करना और उनकी आय व उपयोग की निगरानी करना है. इसके अलावा अवैध कब्जों से संपत्तियों की सुरक्षा, विवादों में हितों की रक्षा तथा वक्फ संस्थाओं के प्रशासन और प्रबंधन पर नजर रखना भी बोर्ड की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है.
