नई दिल्ली:– भुने हुए काले चने प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। इससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर पाचन में मदद करते हैं और खाने के बीच में होने वाली अनहेल्दी क्रेविंग को कम करने में भी सहायक हो सकते हैं।
ढोकला- फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाकर गट हेल्थ को बनाए रखने में मदद करता हैं। इसके अलावा, बेसन से प्रोटीन और फाइबर मिलता है। ढोकले का टेक्सचर हल्का होने के कारण लोग अक्सर इसके न्यूट्रिशनल वैल्यू को कम आंकते हैं, लेकिन जब इसे पारंपरिक तरीके से और सीमित मसालों के साथ बनाया जाता है, तो यह पेट भरने वाला और काफी हद तक संतुलित आहार हो सकता है।
मखाना- मखाना, जिसे फॉक्स नट्स या कमल का बीज भी कहा जाता है। भारत में पारंपरिक रूप से व्रत के दौरान खाया जाने वाला मखाना कुदरती तौर पर कम कैलोरी वाला होता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट, मैग्नीशियम और प्लांट प्रोटीन पाए जाते हैं।
पोहा- चावल से बना पोहा भारत के सबसे पसंदीदा और आम स्नैक्स में से एक है, खासकर पश्चिमी और मध्य इलाकों में। हालांकि कई लोग पोहा को हल्का खाना मानते हैं, लेकिन मूंगफली, करी पत्ता, सब्ज़ियां और राई जैसी चीजों के साथ बनने वाला पोहा शरीर को संतुलित ऊर्जा देता है। मूंगफली से हेल्दी फैट और प्रोटीन मिलता है, जबकि सब्ज़ियों से फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलते हैं।
मूंगफली चिक्की- जरूरी नहीं कि सभी हेल्दी स्नैक्स नमकीन ही हों। मूंगफली और गुड़ से बनाई जाने वाली मूंगफली चिक्की, मीठा होता है, लेकिन इसमें प्रोटीन, हेल्दी फैट और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जबकि गुड़ में थोड़ी मात्रा में आयरन और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं।
इडली- फर्मेंटेशन पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है, जबकि स्टीमिंग से बनी चीजों में तली हुई चीजों की तुलना में फैट कम होता है। चावल और दाल का मेल एक संतुलित अमीनो एसिड प्रोफ़ाइल भी बनाता है।
स्प्राउट चाट- मूंग जैसी अंकुरित दालों से बना यह स्नैक प्रोटीन, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। अंकुरित होने के कारण पोषक तत्वों की बायो-अवेलेबिलिटी बढ़ जाती है।
