छत्तीसगढ़:- मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है. मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए लो प्रेशर एरिया के प्रभाव से झमाझम बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक 16 जुलाई को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया गया है. वहीं कुछ जिलों में तेज बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है.
कैसा रहेगा छत्तीसगढ़ का मौसम?
मौसम विभाग का कहना है कि राज्य में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहेगा. 17 और 18 जुलाई को भी कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. इस दौरान कुछ इलाकों में आंधी-तूफान और बिजली गिरने की भी आशंका है. 19 और 20 जुलाई को भी राज्य के ज्यादातर हिस्सों में बारिश हो सकती है, हालांकि इन दिनों के लिए मौसम से जुड़ी कोई खास चेतावनी जारी नहीं की गई है.
गर्मी और उमस से मिलेगी राहत
बारिश से गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है. मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है. राजधानी रायपुर समेत कई शहरों में दिन भर बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है.
बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव वाले क्षेत्र का असर अब छत्तीसगढ़ में भी दिखाई दे रहा है. इस सिस्टम की वजह से राज्य में बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं. मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय रहेगा और कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है.
बिलासपुर में दर्ज किया गया सबसे ज्यादा पारा
पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई. बिलासपुर में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस भी वहीं दर्ज किया गया.
रायपुर का मौसम
आज रायपुर में दिन भर आसमान में बादल छाए रहेंगे. बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है. शहर का अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है.
29 प्रतिशत कम हुई बारिश
पिछले कुछ दिनों में मानसून के कमजोर पड़ने के कारण राज्य में बारिश सामान्य से 29 प्रतिशत कम हुई है. अब बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र मानसून को फिर से सक्रिय करने वाला है. इसका असर सबसे पहले मध्य और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में देखने को मिल सकता है.
