नई दिल्ली :– जंतर-मंतर पर छात्रों का उफान, NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ गुस्सा, और पुलिस की कथित बर्बर लाठीचार्ज… इस तूफानी माहौल के बीच आज सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया जो पूरे देश को झकझोर गया। दोपहर के लंच ब्रेक के दौरान सुप्रीम कोर्ट के लॉन पर सैकड़ों वकील इकट्ठा हुए। हाथों में तिरंगे और संविधान की कॉपी थामे, उन्होंने सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना पढ़ी – “हम भारत के लोग… न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व” की प्रतिज्ञा दोहराई।
यह “Save Democracy, Save Constitution” अभियान का हिस्सा था। सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह, डॉ. एस. मुरलीधर, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह और अन्य कई सीनियर वकीलों (अनंद ग्रोवर, अरुंधति कट्जू, वृंदा ग्रोवर आदि) ने इसमें हिस्सा लिया। युवा वकीलों की भारी भीड़ ने इसे और भी प्रेरणादायक बना दिया।
क्या हो रहा था जंतर-मंतर पर?
20 जुलाई को Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले हजारों छात्र और युवा “Chalo Sansad” मार्च निकालकर संसद की ओर बढ़े। मांग थी – शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की, NEET और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की, और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और जबरन हटाने का सहारा लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक छात्रों, वकीलों, पत्रकारों और यहां तक कि मेडिकल टीम पर भी हमला हुआ। कई घायल हुए, जिसमें नाबालिग और महिलाएं भी शामिल थीं।
SCBA और SCAORA ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। विकास सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर न्यायिक जांच, दिल्ली पुलिस कमिश्नर की सस्पेंशन और FIR की मांग की। उन्होंने इसे “अनावश्यक और आनुपातिक” बल का इस्तेमाल बताया जो संवैधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 19 और 21) का उल्लंघन है।
वकीलों का संदेश – लोकतंत्र की आवाज
वकीलों ने कहा कि यह सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि संविधान की रक्षा का मुद्दा है। प्रस्तावना पढ़कर उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया – जब जनता सवाल उठाती है तो उसे दबाया नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाओं पर सुनवाई हुई, लेकिन CJI ने कुछ याचिकाओं को तुरंत सुनने से इनकार कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश दिए।
PM मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की, लेकिन प्रदर्शनकारी कह रहे हैं – “पहले जवाबदेही तय करो, फिर सजा दो।” यह घटना याद दिलाती है कि भारत का लोकतंत्र अभी जिंदा है। वकीलों का यह कदम न सिर्फ छात्रों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि पूरे देश को सोचने पर मजबूर करेगा – क्या हम वाकई संविधान के सच्चे रक्षक हैं?
