नई दिल्ली:– कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की युवा बॉक्सर अरुंधति चौधरी ने अदम्य साहस और जज्बे की मिसाल पेश करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। राजस्थान के कोटा की रहने वाली 23 वर्षीय अरुंधति ने 102 डिग्री बुखार होने के बावजूद रिंग में उतरकर शानदार प्रदर्शन किया और देश के लिए गोल्ड मेडल जीत लिया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय राष्ट्रगान गूंजा और उनका वर्षों पुराना सपना भी साकार हो गया।
गोल्ड मेडल जीतने के बाद अरुंधति ने बातचीत में अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और पूरे परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उनका नाम अरुंधति रखा, जिसका अर्थ सूरज की किरण होता है। उन्होंने कहा कि यह जीत परिवार की प्रार्थनाओं, विश्वास और लगातार मिले समर्थन का परिणाम है। अरुंधति ने यह भी बताया कि अब उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि भारत लौटने के बाद सबसे पहले वह अपने परिवार के साथ अपना पसंदीदा खाना खाना चाहेंगी।
15 साल की उम्र तक खेलती थीं बास्केटबॉल
अरुंधति चौधरी की खेल यात्रा भी बेहद प्रेरणादायक रही है। वह 15 वर्ष की उम्र तक जूनियर स्टेट स्तर की बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं। बाद में उनके पिता ने सलाह दी कि उनकी क्षमता और फिटनेस को देखते हुए बॉक्सिंग उनके लिए बेहतर खेल साबित हो सकता है। पिता की सलाह मानकर उन्होंने मुक्केबाजी शुरू की और आज उसी फैसले ने उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडलिस्ट बना दिया।
पिता ने बेटी की जीत के लिए रखा तीन दिन का उपवास
अरुंधति की जीत के पीछे उनके परिवार की आस्था और समर्पण भी देखने को मिला। फाइनल मुकाबले से पहले उनके पिता सुरेश चौधरी लगातार तीन दिनों तक अन्न ग्रहण किए बिना बेटी की जीत के लिए भगवान से प्रार्थना करते रहे। उन्होंने बताया कि उन्हें पूरा विश्वास था कि उनकी बेटी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर ही लौटेगी। जैसे ही जीत की खबर मिली, उनकी आंखें खुशी से नम हो गईं।
पूरे परिवार ने की विशेष पूजा
फाइनल मुकाबले से पहले घर के मंदिर में पूरे परिवार ने विशेष पूजा-अर्चना की। अरुंधति की बहन डॉ. चारु चौधरी ने बताया कि 102 डिग्री बुखार की वजह से पूरा परिवार चिंतित था, लेकिन सभी को विश्वास था कि वह अपनी हिम्मत और मेहनत से जीत हासिल करेंगी। वहीं उनके भाई शिवराज सेमीफाइनल के बाद महाकाल मंदिर जाकर बहन की जीत के लिए प्रार्थना कर आए थे।
जीत के बाद जश्न का माहौल
जैसे ही अरुंधति को विजेता घोषित किया गया, परिवार खुशी से झूम उठा। सभी सदस्य एक-दूसरे के गले लगे, घर में मिठाइयां बांटी गईं, आतिशबाजी की गई और भगवान का आभार व्यक्त किया गया। जीत के बाद वीडियो कॉल पर माता-पिता भावुक हो गए और पूरे परिवार ने इसे न सिर्फ अपनी, बल्कि पूरे कोटा, राजस्थान और देश के लिए गर्व का पल बताया।
देश की बेटियों को दिया संदेश
अरुंधति ने देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा कि “बड़े सपने देखिए, खुद पर विश्वास रखिए और पूरी मेहनत के साथ आगे बढ़िए। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, मंजिल जरूर मिलती है।”
