जेंजरा:–
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर डी.ए.वी. मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, जेंजरा का परिसर राष्ट्रभक्ति, उमंग और तिरंगे की आन-बान-शान से सराबोर नजर आया। भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्वलन से समारोह का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात प्राचार्या डॉ. राज रेखा शुक्ला ने गरिमापूर्ण ध्वजारोहण किया और विद्यार्थियों की जोशीली परेड ने वातावरण में देशभक्ति का उत्साह भर दिया। देशभक्ति गीतों, हिंदी-अंग्रेजी भाषणों एवं कविताओं ने समारोह को भावपूर्ण बना दिया। हिंदी भाषण में उठे सवाल “क्या हम वास्तव में आजाद हुए हैं?” ने सभी को स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ पर सोचने के लिए प्रेरित किया।
नन्हे कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह में विशेष रंग भर दिया। टिनी टॉट्स की देशभक्ति ड्रिल, नन्हे बच्चों का मनमोहक देशभक्ति नृत्य तथा नर्सरी के बच्चों की स्वतंत्रता सेनानियों की वेशभूषा में फैंसी ड्रेस ने खूब तालियां बटोरीं। वहीं नारी सशक्तीकरण पर आधारित स्किट-डांस, फ्रीडम फाइटर्स डांस और आकर्षक झांकियों ने स्वतंत्रता, वीरता और सामाजिक चेतना के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
समारोह को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ. राज रेखा शुक्ला ने छत्तीसगढ़ के वीर सपूत शहीद वीर नारायण सिंह, सोनाखान के अदम्य साहस का स्मरण कराया। उन्होंने उनके प्रेरक शब्द “मैं मर जाऊँगा, लेकिन माफी नहीं माँगूँगा” के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मसम्मान, साहस और सिद्धांतों पर अडिग रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि जीवन में केवल शक्ति नहीं, बल्कि किताबों से ज्ञान, हुनर से क्षमता और चरित्र से पहचान हासिल करना जरूरी है।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को “मैं नहीं कर सकता” वाली सोच से आजादी लेकर “मैं करके दिखाऊँगा” के आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमें भटकाव और समय की बर्बादी से भी आजादी चाहिए। मोबाइल तरक्की और ज्ञान का माध्यम बने, समय बर्बाद करने का साधन नहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को “कोई और करेगा” वाली सोच छोड़कर स्वयं पहल करने तथा “छोटा काम, बड़ी सोच” के मंत्र को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्राचार्या ने तिरंगे को प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर मौजूद जीवन-मूल्यों का प्रतीक बताते हुए कहा कि केसरिया मुश्किलों से लड़ने की हिम्मत, सफेद सत्य और ईमानदारी तथा हरा तरक्की और हुनर का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपना हुनर निखारने, निरंतर सीखने और अपने ज्ञान व कर्म से देश को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उद्बोधन के अंत में विद्यार्थियों ने संकल्प लिया—“मैं ईमानदारी से पढ़ूँगा, गर्व से काम करूँगा और भारत का नाम रोशन करूँगा।”
राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत प्रस्तुतियों और प्रेरणादायी संदेशों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को आजादी के अर्थ, संस्कार, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का जीवंत उत्सव बना दिया। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों को चॉकलेट एवं मिठाई वितरित कर स्नेहपूर्वक विदा किया गया, जिससे स्वतंत्रता दिवस की खुशियां बच्चों के चेहरों पर और भी खिल उठीं।
