नई दिल्ली:– हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पति की लंबी आयु की कामना पूरी होती है। वहीं अविवाहित युवतियां भी मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए कजरी तीज का व्रत रखती हैं।
इस साल कजरी तीज की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में असमंजस है कि व्रत 30 अगस्त को रखा जाएगा या 31 अगस्त को। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 30 अगस्त से शुरू होकर 31 अगस्त तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर इस साल कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
कजरी तीज 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 09:38 बजे शुरू होगी और 31 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 08:52 बजे तक रहेगी।
चूंकि 31 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा।
इस दिन महिलाएं निर्जला या अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा करती हैं।
कजरी तीज पर पूजा के शुभ मुहूर्त
कजरी तीज के दिन पूजा-पाठ के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन मुहूर्तों में पूजा कर सकते हैं।
अमृत चौघड़िया: सुबह 05:58 बजे से 07:34 बजे तक
शुभ चौघड़िया: सुबह 09:10 बजे से 10:45 बजे तक
लाभ चौघड़िया: दोपहर 03:33 बजे से शाम 05:08 बजे तक
अमृत चौघड़िया: शाम 05:08 बजे से 06:44 बजे तक
सूर्योदय: सुबह 05:58 बजे के आसपास
सूर्यास्त: शाम 06:44 बजे
दिन के प्रमुख मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:29 बजे से 05:14 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक
संध्या काल: शाम 06:44 बजे से 07:51 बजे तक
मुहूर्त स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। पूजा के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।
कजरी तीज का व्रत क्यों रखा जाता है?
कजरी तीज को सुहाग और दांपत्य सुख से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं।
मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। वहीं जिन युवतियों का विवाह नहीं हुआ है, वे भी अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत कर सकती हैं।
कई क्षेत्रों में कजरी तीज को स्थानीय लोक परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इसलिए पूजा की विधि में क्षेत्र के अनुसार कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।
कजरी तीज की पूजा विधि
कजरी तीज के दिन व्रती महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ या नए कपड़े पहनकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है।
इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके वहां पूजा की तैयारी की जाती है। कई क्षेत्रों में मिट्टी और गोबर से तालाब के आकार की आकृति बनाई जाती है। इसके पास नीम की डाली स्थापित कर उसे नीमड़ी माता के रूप में पूजा जाता है।
इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। पूजा में रोली, अक्षत, मेहंदी, फल, फूल, मिठाई, वस्त्र और सुहाग से जुड़ी सामग्री अर्पित की जाती है।
कई स्थानों पर सत्तू से बने पकवान या अन्य पारंपरिक भोग भी भगवान को अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान कजरी तीज की व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी शुभ माना जाता है।
सुहाग की सामग्री चढ़ाने की परंपरा
कजरी तीज पर महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं। इसमें सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी, बिंदी, चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल हो सकती है।
पूजा के बाद महिलाएं अपने पति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग की सामग्री देकर पर्व की शुभकामनाएं भी देती हैं।
रात में चंद्रमा को अर्घ्य देना क्यों है खास?
कजरी तीज के व्रत में चंद्र दर्शन का भी विशेष महत्व माना जाता है। शाम के बाद जब चंद्रमा दिखाई देता है, तब महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।
इसके लिए एक पात्र में जल लेकर उसमें थोड़ा दूध, रोली और अक्षत मिलाया जाता है। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
इसके बाद व्रत कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है। अपनी पारंपरिक मान्यता के अनुसार महिलाएं पूजा पूरी करने के बाद व्रत का पारण करती हैं।
कजरी तीज पर इन बातों का रखें ध्यान
कजरी तीज पर इन बातों का रखें ध्यान
कजरी तीज के दिन पूजा के दौरान मन को शांत और सकारात्मक रखना चाहिए। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा श्रद्धा से करें और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान करें।
व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या डॉक्टर ने उपवास से मना किया है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
नोट: कजरी तीज की तिथि और मुहूर्त पंचांग एवं स्थान के अनुसार कुछ अंतर के साथ हो सकते हैं। यहां दी गई जानकारी सामान्य पंचांग गणना और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग को अंतिम आधार मानें।
