नई दिल्ली:– आजकल पेरेंट्स के सामने एक बड़ी समस्या है कि बच्चों को मोबाइल फोन से दूर कैसे रखा जाए। कुछ भी समझाने के बाद भी बच्चे इसे समझ नहीं पाते। हालांकि, कई बच्चे यह जानते हैं कि मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल ठीक नहीं है, लेकिन वे यह नहीं समझ पाते कि आखिर इसके अधिक उपयोग से खुद को कैसे बचाएं। ऐसी ही परेशानी लेकर नौवीं कक्षा का एक छात्र प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचा था। उसने बताया कि उसे मोबाइल चलाने में बहुत मजा आता है और वह इससे छुटकारा पाना चाहता है। छात्र की बात सुनकर संत ने उसे एक अहम सीख दी, जो हर बच्चे और पेरेंट्स को सुननी चाहिए।
प्रेमानंद महाराज से एक छात्र ने कहा, ‘मैं अभी नौवीं कक्षा में पढ़ता हूं। मेरा ध्यान पढ़ाई में ज्यादा नहीं लगता, लेकिन मोबाइल चलाने में बहुत मजा आता है। महाराज जी, इस फोन से छुटकारा पाने का कोई उपाय बताइए।’ छात्र की बात सुनकर संत ने उसे समझाया कि मोबाइल में मजा मत ढूंढो, वरना आगे गड़बड़ हो सकती है।
संत आगे कहते हैं कि अगर मोबाइल में ही आनंद खोजोगे, तो धीरे-धीरे पढ़ाई में मन लगना मुश्किल हो जाएगा।’ इसके बाद उन्होंने समझाया कि फिर गेम खेलना, सीरियल देखना, गंदी बातें देखना और धीरे-धीरे गंदे आचरण में फंस जाना। संत कहते हैं कि मोबाइल में गुण और दोष दोनों हैं।
वे कहते हैं कि अगर आपने हमारा प्रवचन मोबाइल पर नहीं सुना होता, तो क्या यहां आकर बैठते? मोबाइल से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है। डॉक्टर, पुलिस या दूर बैठै रिश्तेदार से संपर्क किया जा सकता है, चाहे वे कितनी भी दूर क्यों न हों। यह बहुत लाभदायक है, लेकिन अगर हम मोबाइल के दोषों की ओर न जाएं और उसके गुणों को स्वीकार करें, तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर उसके दोषों को स्वीकार कर लिया, तो फिर दिक्कत है।
