नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ( एफएसएसएआई ) से पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर ‘फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग’ लागू करने के लिए प्रस्तावित समयसीमा को लेकर सवाल किया और पूछा कि जब मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा है तो वह इसमें इतना समय क्यों लगाना चाहता है।
क्या होती है फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग
फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) खाद्य पदार्थों के पैकेट पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी का एक ग्राफिक है, जो उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ खरीदने और स्वस्थ आहार संबंधी विकल्प चुनने के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
पीठ ने एफएसएसएआई से पूछा सवाल
जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पूछा कि जब मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा है तो एफएसएसएआई इतना समय क्यों बर्बाद करना चाहता है। पीठ ने कहा कि अब तक आपने जो कुछ किया है, हम उसकी सराहना करते हैं और आपकी पहल की भी सराहना करते हैं।
बहुत कुछ किया जाना बाकी
पीठ ने आगे कहा कि लेकिन हम जो हासिल करना चाहते हैं और जहां पहुंचना चाहते हैं, उसे सार्थक रूप से लागू करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हम यह पूरी कवायद राष्ट्र और नागरिकों के हित में कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि प्राधिकरण हमारे आदेश को उसकी वास्तविक भावना में स्वीकार करेगा।
पीठ ने आदेश रखा सुरक्षित
पीठ ने कहा कि एक साल तक स्वैच्छिक अनुपालन क्यों? आपको इतना समय क्यों चाहिए? आप सुनवाई करने और आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया नए सिरे से क्यों शुरू करना चाहते हैं? आपने 2022 में शुरुआत की थी, पिछले चार वर्षों में आपने क्या किया? पीठ ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
कोर्ट में क्या बोला FSSAI का वकील
एफएसएसएआई की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 2022 में जो प्रक्रिया शुरू की गई थी, वह भारतीय पोषण रेटिंग (आईएनआर) की स्टार-रेटिंग प्रणाली से संबंधित थी और उस समय इसके मानदंड पूरी तरह अलग थे।
एफएसएसएआई ने दिया ये प्रस्ताव
एफएसएसएआई ने अब ऐसे पैकेटबंद खाद्य उत्पादों के लिए लाल षट्कोण के आकार का चेतावनी लेबल अपनाने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें चीनी, वसा और नमक जैसे स्वास्थ्य के लिए जोखिम वाले तत्वों की मात्रा अधिक है। यह चेतावनी लेबल खाद्य पैकेट के सामने सफेद चौकोर पृष्ठभूमि पर लाल षट्कोण के रूप में दिखाई देगा।”
अंतिम रूप देने में लगेंगे चार महीने
खाद्य नियामक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मसौदा नियम जारी करने और उन्हें अंतिम रूप देने में करीब चार महीने लगेंगे। उसने बताया कि मसौदा संशोधन नियमों को हितधारकों से सुझाव लेने के लिए 60 दिनों तक प्रकाशित किया जाएगा। इसके लिए घरेलू स्तर पर और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंच के माध्यम से परामर्श किया जाएगा।
खाद्य कारोबार संचालकों के लिए रखा ये प्रस्ताव
इसके अलावा, एफएसएसएआई ने नियमों की अधिसूचना जारी होने के बाद खाद्य कारोबार संचालकों के लिए 365 दिनों की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि का प्रस्ताव रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले एफएसएसएआई से ‘‘चिंता वाले तत्वों’’, वसा, चीनी और नमक के लिए प्रस्तावित लेबल के संबंध में और स्पष्टीकरण देने को कहा था।
किस याचिका की सुनवाई कर रहा था कोर्ट
कोर्ट ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ नामक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य एफओपीएल लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
FSSAI ने पिछले महीने हल्फनामे में कही थी ये बात
पिछले महीने दाखिल अनुपालन हलफनामे में एफएसएसएआई ने कहा था कि दो चरणों में लागू किए जाने वाले प्रस्ताव का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसे खाद्य उत्पादों के बारे में सरल, प्रमुख और आसानी से समझ में आने वाली चेतावनी देना है, जिनमें चिंता वाले निर्दिष्ट पोषक तत्वों की मात्रा अधिक है।
उत्पादों में सुधार के लिए पर्याप्त समय
एफएसएसएआई के हलफनामे में कहा गया था कि एफओपीएल को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का उद्देश्य ‘‘उपभोक्ताओं की स्वीकार्यता’’ सुनिश्चित करना और ‘‘उद्योग को उत्पादों में सुधार के लिए पर्याप्त समय देना’’ है।
