छत्तीसगढ़:- समृद्ध जैव-विविधता और घने जंगलों को अब वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलने जा रही है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सिंगापुर दौरे के दौरान मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व (Mandai Wildlife Reserve) के अवलोकन ने राज्य में इको-टूरिज्म के एक नए युग की नींव रख दी है. सिंगापुर के विश्वस्तरीय वाइल्डलाइफ संरक्षण और टूरिज्म मैनेजमेंट मॉडल का गहराई से अध्ययन करने के बाद राज्य सरकार ने बस्तर से लेकर सरगुजा तक फैले प्राकृतिक सौंदर्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की है.
इस दूरगामी पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ बस्तर, कांगेर घाटी, और अचानकमार जैसे क्षेत्रों में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं विकसित करना है. राज्य की लगभग 44 प्रतिशत वन भूमि और समृद्ध जैविक संपदा को आधार बनाकर तैयार किया जाने वाला यह मॉडल न केवल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि स्थानीय आदिवासियों, युवाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए स्वरोजगार और आय के नए दरवाजे भी खोलेगा.
छत्तीसगढ़ की करीब 44 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व का दौरा कर वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म की व्यवस्थाएं देखीं. साय भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सिंगापुर में आयोजित प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में भाग लेने पहुंचे हैं.
छत्तीसगढ़ की करीब 44 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र है. बस्तर से सरगुजा तक फैले जंगल, समृद्ध जैव-विविधता और राष्ट्रीय उद्यान-अभयारण्य राज्य को इको-टूरिज्म के लिए विशिष्ट आधार देते हैं. सरकार अब इन प्राकृतिक संसाधनों को बेहतर पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय भागीदारी से जोड़कर पर्यटन की नई संभावनाएं तलाश रही है.
इको-टूरिज्म मॉडल तैयार करने का लक्ष्य
Mandai Wildlife Reserve में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक परिवेश में वन्यजीव संरक्षण, पर्यटकों के अनुभव, प्रबंधन व्यवस्था और जागरूकता गतिविधियों का अध्ययन किया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ में विकास का मॉडल उसकी अपनी भौगोलिक और जैव-विविधता संबंधी विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए.
साय ने कहा कि सिंगापुर की व्यवस्थाओं को हूबहू अपनाने के बजाय वहां के सफल अनुभवों को छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुसार उपयोग में लाया जाएगा. लक्ष्य ऐसा इको-टूरिज्म मॉडल तैयार करना है, जिसमें जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा स्थानीय समुदायों, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आय के नए अवसर बनें.
छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पर्यटन
बस्तर, कांगेर घाटी, अचानकमार, इंद्रावती और उदंती-सीतानदी जैसे क्षेत्र छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पर्यटन क्षमता को दर्शाते हैं. इन क्षेत्रों में संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का बेहतर समन्वय राज्य को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय इको-टूरिज्म मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
