नई दिल्ली:- हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में भुखमरी की समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सभी लोगों तक पर्याप्त व पौष्टिक भोजन पहुंचाने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। कृषि उत्पादन बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों को खाद के सही उपयोग के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया जाता है।
खेती में खाद और उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फसलों को बेहतर विकास के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनकी सही मात्रा में उपलब्धता से फसल की वृद्धि और उत्पादन में सुधार हो सकता है। हालांकि, रासायनिक उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
जैविक खाद के उपयोग पर जोर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गोबर की खाद, कम्पोस्ट और हरी खाद जैसे जैविक विकल्प मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी संरचना सुधारने में मदद कर सकते हैं। किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए, ताकि फसलों को जरूरी पोषक तत्व मिलें और खेती की लागत को भी नियंत्रित किया जा सके।
खाद्य सुरक्षा के लिए टिकाऊ खेती जरूरी
विश्व खाद दिवस हमें याद दिलाता है कि बढ़ती आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाना आवश्यक है। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, पानी का उचित प्रबंधन करना और खाद का संतुलित इस्तेमाल करना भविष्य में बेहतर कृषि उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर किसानों और आम नागरिकों को खाद्य सुरक्षा, पोषण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पर्याप्त भोजन और उपजाऊ जमीन सुरक्षित रखी जा सके।
