नई दिल्ली:- भिलाई स्टील प्लांट को बेचे जाने की अफवाहें इन दिनों काफी चर्चा में हैं। विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा लगातार यह आशंका जताई जा रही थी कि इस बड़े प्लांट को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। इन तमाम दावों और राजनीतिक बयानों के बीच अब देश के इस्पात मंत्रालय ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
इस्पात मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए साफ कर दिया है कि भिलाई स्टील प्लांट को बेचे जाने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। मंत्रालय ने इस संबंध में कुछ समाचार पत्रों में छपी खबरों की कतरनों को भी साझा किया है और लोगों से ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। सरकार का यह बयान उन सभी आशंकाओं पर विराम लगाता है जो राजनीतिक गलियारों में तैर रही थीं।
विधायक ने दी खुली चुनौती
इस पूरे मामले पर स्थानीय राजनीति भी काफी गर्म नजर आ रही है। स्थानीय विधायक रिकेश सेन ने अपने सोशल मीडिया पेज पर एक तीखा पोस्ट साझा किया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव को आड़े हाथों लेते हुए खुली चुनौती दी है। विधायक ने कहा है कि यदि भिलाई स्टील प्लांट को अडानी समूह द्वारा खरीदे जाने का दावा किया जा रहा है, तो इसके समर्थन में पुख्ता प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं।
विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भिलाई के विकास और मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने राजनेताओं से अपील की कि वे अपनी राजनीतिक लड़ाइयों में भिलाई और उसके कारखाने को न घसीटें। विधायक ने यह भी ऐलान किया कि यदि भविष्य में कभी भी भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण की नौबत आती है, तो विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे वह खुद खड़े होंगे और धरने पर बैठेंगे।
सरकार की प्राथमिकता
केंद्र सरकार लगातार भिलाई स्टील प्लांट के आधुनिकीकरण और इसे और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस प्लांट की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और क्षेत्रीय रोजगार की सुरक्षा करना है। भिलाई के निवासियों के लिए यह प्लांट सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि उनकी पहचान और गौरव का प्रतीक है। ऐसे में बिना किसी ठोस सबूत के इस तरह की अफवाहें फैलाना जनता के बीच भ्रम पैदा करता है।
प्रशासन और जिम्मेदार मंत्रालयों के ताजा रुख से यह स्पष्ट हो चुका है कि प्लांट पूरी तरह सुरक्षित है। जनता और कर्मचारियों को किसी भी तरह की अशांति या भ्रम में आने की जरूरत नहीं है। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और आम जनता से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक सूचनाओं को आगे बढ़ाने से बचें।
