कोरबा:- दशहरा उत्सव आयोजन के दौरान बाँकीमोगरा थाना क्षेत्र के गजरा मैदान में अच्छा खासा बवाल मच गया। यह विभिन्न आयोजन समिति से जुड़े लोगों के बीच ही मचा, जो कि आपस में परिचित हैं। दोनों पक्ष का वास्ता धुर विरोधी अलग-अलग राजनीतिक दल से जुड़े लोगों का होने के कारण इनके बीच तनाव कुछ ज्यादा ही बढ़ता नजर आया। पूरे मामले में किसी भी तरह की शिकायत थाना में नहीं की गई है। हालांकि पूरे घटना के दौरान आयोजन स्थल पर स्वयं थाना प्रभारी और चंद पुलिसकर्मी जरूर मौजूद थे।
थाना प्रभारी की आंखों के सामने यह सारा विवाद और उलझनें होना बताया जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के हवाले से ज्ञात हुआ है कि आयोजन को लेकर मनमुटाव और तनातनी का सिलसिला 2 साल पहले शुरू हुआ था। इसकी वजह से एक ही डाल के पंछी अलग-अलग गुटों में बट गए। पहले जहां गजरा के मैदान में डांडिया-गरबा का आयोजन होता आ रहा था, वह पिछले साल से चौपाटी मैदान और गजरा मैदान में अलग-अलग होने लगा। इस बार भी ऐसा ही हुआ लेकिन क्षेत्र का संयुक्त रूप से एक कार्यक्रम गजरा के मैदान में रावण दहन के पश्चात प्रारंभ हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठने को लेकर की गई टीका-टिप्पणी इतनी नागवार गुजरी कि दोनों समान गुट के पक्ष और विपक्ष से जुड़े नेता के साथ जमकर हाथापाई, झूमा झटकी मारपीट तक हो गई। ये लोग एक- दूसरे पर झपटते-झगड़ने नजर आए।
चूंकि मैदान में हो रहा आयोजन संयुक्त रूप से था इसलिए दूसरे जगह पर गरबा करने वाले लोग भी इस कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर शामिल हुए और उन्होंने मंच साझा किया। मंच पर ही क्षेत्र के जाने-माने लोग भी बैठे हुए थे जिनका वास्ता भाजपा और एक पक्ष का वास्ता कांग्रेस से है। मंच पर बैठे दूसरे पक्ष के लोगों को लेकर सत्ता पक्ष की तरफ से जुड़े एक खास युवक ने कमेंट किया और यही बात मंच पर बैठे इनके ही लोगों को नागवार गुजरी।
मंच पर बैठने को लेकर कमेंट क्यों किया, इस बात को लेकर जब बात शुरू हुई तो बहुत दूर तक निकल पड़ी। देखते ही देखते एक ही दल से वास्ता रखने वाले और आपस में परिचित दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। कॉलर पकड़ा-पकड़ी, झूमा-झटकी, गाली गलौज, शोर शराबा का दौर शुरू हुआ। इस बीच कांग्रेस से वास्ता रखने वाले एक पदाधिकारी भी दौड़कर वहां पहुंचे तो उन्हें भी गुस्से का सामना करना पड़ा। फिर क्या था, इसने अपना आदमी बुलाया, उसने अपना आदमी बुलाया, तीसरे ने अपना आदमी बुलाया और झूमा झटकी होती रही।
सूत्र ने बताया कि इतने लोगों को लड़ते -झगड़ते देख स्थल पर मौजूद थाना प्रभारी भी हक्के-बक्के रह गए कि इनको कंट्रोल कैसे करें? क्योंकि यह सत्ता पक्ष से जुड़े लोग थे। इस बीच यहां इनके मुखिया की एंट्री हुई और उन्होंने दोनों पक्ष को शांत कराया। बात इस तरह बनाई गई कि किसी के द्वारा भी थाना में किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की जाएगी और यह मामला थाना नहीं जाना चाहिए। अब बड़े भैया की बात भला लोग कैसे न मानें क्योंकि निभाना तो इन्हीं के साथ रहकर ही है।
आखिरकार, विवाद शांत हुआ लेकिन इस विवाद में उलझे हुए लोग तड़के 6 बजे तक अपना खुन्नस उतारने के लिए खोजबीन में लगे रहे। मामला बाँकीमोगरा क्षेत्र और यहां के राजनीतिक गलियों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। साथ ही स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे हैं। यह तर्क सही है कि जब कोई रिपोर्ट ही नहीं लिखाएगा तो भला क्या एक्शन लेंगे! अब देखने वाली बात यह है कि इस घटनाक्रम और थप्पड़ खाए लोगों का ईगो क्या हर्ट होगा? क्या वे अपने अपमान का बदला लेने के लिए थाना की चौखट पार करेंगे या फिर भाईचारा, नफा-नुकसान का आंकलन कर सब कुछ भुला दिया जाएगा…?
