नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सार्वजनिक बहस की राहुल गांधी की पेशकश पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि सवाल पूछने और चर्चा करने के लिए संसद का मंच पहले से मौजूद है। वित्त मंत्री ने विपक्ष पर सरकार के जवाब के दौरान वॉकआउट करने और सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप भी लगाया।
राहुल बोले—जगह और निर्णायक आप तय कीजिए
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर अपनी बहस की चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी पसंद का मंच और स्थान चुन सकते हैं। बहस मीडिया और देश के युवाओं की मौजूदगी में होनी चाहिए।
राहुल ने विपक्ष को राष्ट्रविरोधी बताने और विदेशी ताकतों से संबंधों के आरोपों पर आमने-सामने चर्चा की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को निर्णायक बना सकते हैं।
आर्थिक व्यवस्था और अमेरिका से समझौतों पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने प्रस्तावित बहस में देश की वित्तीय व्यवस्था, आर्थिक ढांचे और अमेरिका के साथ हुए समझौतों की प्रक्रिया जैसे विषय शामिल करने की बात कही। उन्होंने कैबिनेट को जानकारी दिए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए और प्रधानमंत्री से बहस की चुनौती स्वीकार करने का आग्रह किया।
निर्मला ने पूछा—संसद में वही उत्साह क्यों नहीं?
सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी जिस तरह सोशल मीडिया पर बहस के लिए उत्साह दिखाते हैं, वैसा ही रुख संसद में भी दिखाना चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से एसआईआर और ईवीएम पर चर्चा के लिए विशेष सत्र की पेशकश का उल्लेख किया।
वित्त मंत्री का कहना था कि जवाब मांगने के साथ दूसरे पक्ष को सुनना भी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी कई बार सरकार का जवाब पूरा होने से पहले सदन से बाहर चले जाते हैं।
मॉक संसद पर तंज, आरोपों के साथ प्रमाण देने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर आयोजित मॉक संसद पर भी सीतारमण ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वास्तविक संसद के प्रति भी गंभीरता दिखाई जानी चाहिए। राहुल गांधी से आरोपों के समर्थन में स्पष्ट प्रमाण रखने की मांग करते हुए उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी का उल्लेख किया।
