नई दिल्ली:- महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर राज्य सरकार ने व्यापारियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के बाद राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने खुले खाद्य तेल की बिक्री पर एक साल की छूट जारी रखने का फैसला किया है। जब तक बिक्री को लेकर नई कार्यप्रणाली और नीति निर्धारित नहीं हो जाती, तब तक यह राहत लागू रहेगी।
दिवाली के त्योहार को देखते हुए लिए गए इस फैसले से पारंपरिक तरीके से खाद्य तेल बेचने वाले व्यापारियों को अपना कारोबार जारी रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर व्यावहारिक नीति तैयार करने के लिए सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी। इसके लिए एक समिति गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस संबंध में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में मंत्रालय में बैठक आयोजित की गई। इसमें खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
छोटे व्यापारियों और ग्राहकों को राहत
खुले खाद्य तेल की बिक्री पर प्रतिबंध संबंधी फैसले के बाद राज्य के पारंपरिक तेल कारोबारियों, छोटे दुकानदारों और ग्राहकों के सामने कई सवाल खड़े हो गए थे। बैठक में इन समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि दिवाली के दौरान खाद्य तेल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में व्यापारियों को कारोबार में परेशानी नहीं होनी चाहिए और ग्राहकों को भी आसानी से खाद्य तेल उपलब्ध होना चाहिए।
मिलावट रोकना सरकार की प्राथमिकता
मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि खाद्य तेल में मिलावट रोकना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण तेल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि, वर्षों से पारंपरिक तरीके से कारोबार कर रहे छोटे व्यापारियों की आजीविका का भी ध्यान रखना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, लेकिन छोटे व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक और व्यावसायिक बोझ न पड़े।
नीति बनाने के लिए गठित होगी समिति
सरकार की ओर से दी गई एक साल की अवधि के दौरान व्यापारी संगठनों, खाद्य एवं औषधि प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चर्चा की जाएगी। इसके बाद खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर व्यापक और व्यावहारिक नीति तैयार की जाएगी। इसके लिए एक सर्वसमावेशी समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य व्यापारियों को राहत देना, पारंपरिक कारोबार को जारी रखना और साथ ही उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना है।
