नई दिल्ली:- ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश प्रचेता के अनुसार, शनिवार सुबह 10:48 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी, जो रविवार सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात अमावस्या तिथि का आरंभ हो जाएगा। छोटी दिवाली की शाम को यमराज के निमित्त दीपदान किया जाएगा।
नरकासुर के वध से जुड़ी है नरक चतुर्दशी की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध से है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत कर हजारों बंदियों को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर उन्हें फूल, धूप, दीप और मिठाई अर्पित की जाती है।
छोटी दिवाली को रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन सुबह स्नान से पहले शरीर पर तिल का तेल और पारंपरिक उबटन लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे आरोग्य, सौंदर्य और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि इस विधि से स्नान करने से शरीर और मन की शुद्धि होती है।
दक्षिण दिशा में जलाया जाता है यमराज के नाम दीपक
ज्योतिषाचार्य अनिता पाराशर के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर यम दीपदान का विशेष महत्व है। शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाकर यमराज से परिवार की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की जाती है।
धार्मिक विश्वास है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। इसी परंपरा को यम दीपम भी कहा जाता है।
हनुमान चालीसा का पाठ और दान करना भी शुभ
छोटी दिवाली पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ हनुमानजी की आराधना का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन हनुमानजी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और भोजन दान करने की परंपरा भी है।
इस तरह छोटी दिवाली का पर्व केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भगवान श्रीकृष्ण की विजय का स्मरण, यमराज के निमित्त दीपदान, आरोग्य की कामना और जरूरतमंदों की सेवा जैसे धार्मिक कार्य शामिल हैं।
