कोरबा, 27 जनवरी । जहां देश 73 वां गणतंत्र दिवस मना रहा था वहीं एक पहाड़ी कोरवा परिवार ऐसा है जो आज भी अपने अधिकारों से वंचित है उनकी परिस्थिति ऐसी है कि देखकर आप भी कहेंगे हे भगवान इससे तो अच्छा मौत दे दे । आप जो तस्वीर देख रहे हैं वह कोरबा जिले के जनपद कोरबा अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत लेमरू की जहां पिछले 13 वर्षों से राष्ट्रपति की दो दत्तक पुत्री पहाड़ी कोरवा बच्चियां जमीन में पड़ी जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। दोनों बच्चियां सगी बहने हैं और पहले हंसी खुशी स्कूल भी जाती थी, लेकिन अचानक 12 साल पहले दोनों बच्चियों की तबीयत खराब हुई सड़क व अन्य संसाधन नहीं होने के कारण बच्चों का इलाज पहाड़ी कोरवा परिवार नहीं करा पाया और मात्र जड़ी बूटी के इलाज से बच्चियों को ठीक करने की कोशिश करते रहे लेकिन आज 13 साल होने को है पहाड़ी कोरवा बच्चियां जो अब 18 और 15 साल की हो गई हैं लेकिन उनका शारीरिक विकास नहीं होने के कारण अभी भी छोटी बच्चियां नजर आते हैं पिछले 12 सालों से मात्र दो से 3 फीट की जमीन में यह दोनों बच्ची लाचारी और बीमारी से भरी अपनी जिंदगी की सांसे गिन रही है जिसे देख शायद आपको भी लगे कि भगवान इससे अच्छा तो मौत ही दे दे।

पहाड़ी कोरवा टिकैत राम इन दोनों बच्चियों सहित पांच और लड़कों के पिता है पिछले 1 साल से टिकैत राम के पैर मैं लोहे की चोट लगने इंफेक्शन फैला हुआ है जिसके बाद कुछ ना कर पाने की स्थिति में परिवार के भूखे मरने की स्थिति आ गई तब टिकैत राम के दो बेटे क्योंकि जो संभवत अभी नाबालिक है पिछले 4 महीने पहले दलालों के चंगुल में फंसकर कर्नाटक बोरवेल में मजदूरी के लिए पलायन कर चुके हैं जिसके लिए परिवार चिंतित रहता है क्योंकि बच्चों से किसी तरह की बात भी नहीं हो पा रही है। क्षेत्र में पहाड़ी कोरवाओं की स्थिति बहुत ही खराब है।

जब हमने सरकारी योजनाओं के बारे में पूछा तो उन्हें कुछ मालूम ही नहीं था। पहाड़ी कोरवा को प्रधानमंत्री आवास शौचालय उज्जवला गैस व अन्य सुविधाएं देने के विभागों के सारे दावे फेल साबित हुए।
एक और जहां टिकैत राम का परिवार इतनी गंभीर परिस्थिति से जूझ रहा है वही लेमरू एवं अन्य पंचायत के मोहल्लों में भी निवासरत पहाड़ी कोरवा परिवारों के पास मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखने को मिला भले ही सरकार दावे कर रही है कि उनका उत्थान किया जा रहा है लेकिन यहां संबंधित विभागों ने आंख में पट्टी बांध रखी है और उनके हिस्से में आने वाले फंड को खुद डकार रहे हैं उनके पास ना तो प्रधानमंत्री आवास है आज भी खुले छत में कड़कड़ाती ठंड के बीच रहने को मजबूर हैं वहीं पीने का पानी नदी से लाना पड़ रहा है पथरीली सड़कों से गाने जंगलों के बीच गुजर कर 14 किलोमीटर दूर राशन लेने जाना पड़ता है स्वच्छ भारत मिशन के शौचालय भी कागजों में बना दिए गए है स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए जाने वाले शिविर भी इन तक नहीं पहुंच पाते कुल मिलाकर ट्राइबल विभाग जिसकी जवाबदारी होती है इनके संरक्षण और उत्थान की यह विभाग पहाड़ी कोरवा के नाम से आने वाले पैसे को पूरी तरह अपने उत्थान में लगा रहा है क्योंकि अगर ट्राइबल विभाग इन पहाड़ी कोरवा की और ध्यान देती तो आज राष्ट्रपति की दत्तक पुत्र कहे जाने वाली यह दो पहाड़ी कोरवा बच्चियां 3 फीट जमीन में जिंदगी की जंग नहीं लड़ रही होती और इनके दो भाई पलायन के लिए मजबूर नहीं होते इतना ही नहीं जानकारी होने के बाद भी संबंधित विभाग का अमला या जिले के मुखिया अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे और ना ही ट्राइबल विभाग के अधिकारी एवं कलेक्टर ने फोन उठाना मुनासिब समझा।

गणतंत्र दिवस दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण करने जब कोरबा जिले के प्रभारी मंत्री एवं आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास स्कूल शिक्षा सहकारिता विभाग छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम पहुंचे तो उनसे राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी संरक्षित जनजाति की दयनीय स्थिति के बारे में चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि अधिकारियों के इस तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उन्हें सख्त से सख्त व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए जाएंगे जरूरत पड़ी तो संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही भी की जाएगी।
ट्रायबल रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार कोरबा जिले में 1148 पहाड़ी कोरवा परिवार के लोग 64 मजरे , टोलों में बसे हैं , जिनकी कुल आबादी 4012 के लगभग है । यह आंकड़ा वर्ष 2004-05 के बाद 14-15 में हुए सर्वे के अनुसार है । शासन की मंशा के अनुरूप उनका विकास आज भी कोसों दूर है आज भी इनका रहन – सहन व खान – पान वहीं कोरवाओं के बीच पहुंचने पर पता चला कि उनका रहन – सहन ही नहीं खान पान भी पारंपरिक ही है । जब हम पहुंचे तो हमें सामूहिक रूप से दोना पत्तल में बदबूदार चावल की माड़ी जिसमें हल्का सा नशा होता है और कुछ अजीब सा भोजन पत्तल में देखने को मिला जिससे साफ जाहिर हो रहा था की इनके खान पान में भी अभी बदलाव नहीं हुआ है।