कोरबा/पाली, 22 फरवरी। ग्राम पंचायतों के चौंक- चौराहों एवं गली- मोहल्लों में जिला खनिज न्यास मद से लगाए जा रहे इलेक्ट्रिक सोलर लाईट की आड़ में प्रभावशाली ठेकेदार के साथ जनपद अधिकारी- कर्मचारी की हो रही बल्ले- बल्ले,जिसकी आड़ में पंचायतों से चार गुना राशि भुगतान कराकर खनिज मद की भारी भरकम राशि पर लूट मचा वारा- न्यारा किया जा रहा है।
बता दें जनपद पंचायतों के माध्यम से अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायतों में इलेक्ट्रिक सोलर लाइट लगाया जा रहा है, कार्य का जिम्मा महाराष्ट्र के एक ठेकेदार को दिया गया है। खनिज न्यास मद से उक्त कार्य के लिए जारी जिस राशि का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। सूत्रों कि माने तो जिस ठेकेदार को यह काम सौंपा जाता है उसे उच्च प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त होने के चलते पंचायतों में यह गड़बड़झाला द्रुत गति से चल रहा है। जनपद के अधिकारी- कर्मचारियों द्वारा सरपंच- सचिव से प्रस्ताव मंगाए जा रहे जिसकी कार्ययोजना आरईएस के उपयंत्रियों से तैयार कराया जा रहा है, जिले के डीएमएफ शाखा में जमा करने पश्चात लाखों की राशि पंचायत खाते में सीधे जमा हो रही। कार्य पूर्ण करने के तत्काल बाद सरपंच- सचिवों पर दबाव बना राशि का भुगतान ठेकेदार को हाथों- हाथ कराया जा रहा है। जिसके पीछे जनपद अधिकारी व पंचायतों से राशि भुगतान कराने वाले धनकुबेर कर्मचारी कमीशन की राशि से लाल हो रहे है। इस प्रकार पाली ब्लाक के लगभग 90 प्रतिशत पंचायतों में इलेक्ट्रिक सोलर लाईट लगाने का कार्य पूर्ण हो चुका है।
पंचायतों में लगाए जा रहे इलेक्ट्रिक सोलर लाईट का स्टीमेट जिले के डीएमएफ शाखा में जमा करने उपरांत पंचायत खाते में लाखों की राशि जमा की जा रही है। जहां चौंक- चौराहों में 05 एलईडी वाले तीन नग सोलर लाईट की कीमत 18 लाख व गली- मोहल्लों में लगने वाले सिंगल 42 नग एलईडी की कीमत 19 लाख 66 हजार निर्धारित की गई है। तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जो इलेक्ट्रिक लाईट लगाया जा रहा है उसकी उतनी कीमत नही जितनी तय दर पर संबंधित ठेकेदार को भुगतान किया जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि डीएमएफ राशि का खुला दुरुपयोग कर कमीसन बाजी के साथ ठेकेदार को लाभ पहुँचाने का काम हो रहा है। जिसके पीछे की मंशा समझ से परे है।
सोलर लाईट या पैनल संबंधी किसी भी कार्य के लिए शासन द्वारा निर्धारित की गई एजेंसी क्रेडा विभाग है, जिसे कार्य का जिम्मा ना सौंप प्रशासनिक तौर पर जनपद पंचायत व आरईएस के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है। क्रेडा विभाग के अधिकारी भी अचंभित हैं आखिर उन्हें इस जिम्मे से पृथक क्यों रख सोलर लाईट संबंधित कार्य अन्य विभाग के माध्यम से कराया जा रहा। जबकि निर्धारित कार्यों के लिए प्रशासकीय रूप से अलग- अलग विभाग सुनिश्चित किया गया है।
बताते चलें कि उक्त कार्य का जिम्मा महाराष्ट्र के जिस ठेकेदार को मिला है, उसे उच्च प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। जिस वजह से पंचायतों में सोलर लाईट लगाए जाने के तुरंत बाद उसे भुगतान हो रहा है। वही ठेकेदार के पीछे जनपद पंचायत में बैठे सीईओ व डीएमएफ शाखा देख रहे ट्राईबल विभाग के कर्मचारी लखनलाल सूर्यवंशी जो विगत ढाई दशक से भी अधिक समय से जनपद की कुर्सी पर जमे रहकर मनमानी पूर्वक कार्य को अंजाम दे रहे है, सोलर लाईट की कमीशन से मालामाल हो रहे हैं तथा पांचों उंगलियां घी में है।
जिले के सभी पांचों जनपद पंचायत क्रमश- कोरबा, करतला, कटघोरा, पोड़ी उपरोड़ा एवं पाली के अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में एक ही ठेकेदार के माध्यम से इलेक्ट्रिक सोलर लाईट लगाने का कार्य कराया जा रहा है। जिस कार्य की आड़ में जिला खनिज न्यास संस्थान मद की एक भारी- भरकम राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। जिस गड़बड़झाले में नीचे से ऊपर तक की संलिप्ता बताई जा रही है। इस विषय पर जनपद के अधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर के निर्देशों का हमे पालन करना पड़ रहा है, हम इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप नही कर सकते।