बेमेतरा, 8 मार्च। राजधानी से महज 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बेमेतरा जिला में आबकारी विभाग आज भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है नवागढ़ तहसील मुख्यालय में देसी शराब के पव्वा निर्धारित रेट से 10 रुपए अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है तो वहीं बीयर की बोतल तो खुले आम 20 रुपए अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है। शराब दुकान में काम करने वाले सेल्समैन ग्राहक से खुलेआम स्वीकारते है कि देशी शराब प्लेन पौवा 80 की जगह 90 रुपए एवम किंगफिशर बीयर 210 की जगह 230 अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। किंतु जिला आबकारी इंस्पेक्टर प्रकाश देशमुख को सब कुछ ठीक ही दिखता है शराब बिक्री पर हर प्रश्न को नकारते हुए अधिकारी के पास सिर्फ यही जवाब होता है कि शिकायत मिलने पर कार्यवाही होगी। शराब दुकानों की बिक्री से लेकर उनके नियमन में जो भी गड़बड़ी है यह खेल केवल पैसों का ही है शराब दुकान में ग्राहकों को उनके सेल्स मेन खुलेआम कहते हैं शिकायत जहां करनी है करो। अधिकारी टोल फ्री 1404 नंबर होने की भी बात कहते हैं किंतु यह बात और बड़े शंका को जन्म देती है क्योंकि सरकार ने जो गड़बड़ झाले दूर करने की प्रक्रिया तय की है वह प्रक्रिया ही हास्यास्पद है। मजबूर व्यक्ति को टोल फ्री नंबर से उसी आबकारी विभाग को शिकायत करना होता है जो इन शराब दुकानों का संचालन करती है। अब यह बात सोचने वाली है कि जो विभाग खुद ही शराब दुकानों का संचालन कर रही हो, वही विभाग अपने विरुद्ध आए हुए शिकायतों का कैसे तटस्थता के साथ जांच करेगी और उस पर आवश्यक कार्यवाही करेगी। यह पूरी प्रक्रिया मदिरा प्रेमियों को न सिर्फ झांसे में डालने वाली है बल्कि बेवकूफ बनाने वाली भी है। यही कारण है कि जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में सरकारी शराब दुकानों के द्वारा शराब बिक्री की आड़ में न सिर्फ मनमानी,गुंडागर्दी बल्कि प्रतिदिन लाखों रुपए की उपरी कमाई की जा रही है। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार को सर्वाधिक राजस्व देने वाले इस व्यवसाय पर आबकारी विभाग जिले को तो सिर्फ मौन ही रहना है, क्योंकि इसमें ही इनकी भलाई है। बल्कि जिला प्रशासन भी मौन साधे हुए हैं । शराब की बढ़ती कीमतों के कारण शराब खपत में तो कोई कमी नहीं आ रही है बल्कि इसके कारण से समाज में अपराधियों की संख्या में जरूर इजाफा हो रहा है।