बरेली , 19 मार्च। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) ने मुर्गियों में कृत्रिम गर्भाधान के लिए स्वदेशी सीमेन डाइलुएंट तैयार करने में सफलता हासिल की है।
देश में अब तक विदेशी डाइलुएंट इस्तेमाल किया जाता था जिसकी तुलना में स्वदेशी डाइलुएंट सौ गुना सस्ता ही नहीं बल्कि इसे आठ गुना ज्यादा समय तक स्टोर भी किया जा सकता है। उम्मीद जताई जा रही कि स्वदेशी सीमेन डाइलुएंट चलन में आने से मुर्गियों के कृत्रिम गर्भाधान में खर्च बेहद कम हो जायेगा, बल्कि मुनाफा भी बढ़ जाएगा। सीएआरआई की टीम ने करीब 15 साल की रिसर्च के बाद स्वदेशी सीमेन डाइलुएंट विकसित करने में कामयाब हुए।

सीएआरआई के एसोसिएटस वैज्ञानिक डॉ. जगमोहन के मुताबिक स्वदेशी सीमेन डाइलुएंट जरिए एक मुर्गे से 1 सप्ताह में करीब 80 मुर्गियों में कृत्रिम गर्भाधान किया जा सकता है. इससे प्रजनन की दर 90 फ़ीसदी बढ़ जाती है ,स्वदेशी केरी पोल्ट्री सीमेंट डाइलुएंट विदेशी से 100 गुना से भी ज्यादा सस्ता है.
श्री जगमोहन ने बताया कि विदेशी डाइल्यूएंट के 100 मिलीलीटर की कीमत 12 से 14 सौ रुपया है जबकि स्वदेशी डाइल्यूएंट की कीमत महज 10 से 12 रुपया हो तक होगी। विदेशी डाइल्यूएंट को अधिकतम 8 घंटे तक स्टोर किया जा सकता है ,इसके बाद यह उपयोग के लायक नहीं रहता लेकिन स्वदेशी डाइल्यूएंट का स्टोरेज 48 घंटे तक किया जा सकता है।
उन्होने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान के लिए उत्तम नस्ल के मुर्गों से सीमेन लेकर मुर्गियों में डाला जाता है। कुक्कुट समेत अन्य पक्षियों का सीमेन बेहद गाढ़ा और कम होता है। प्राकृतिक गर्भाधान में एक बार में पूरा सीमेन इस्तेमाल होता है। इससे सिर्फ एक मुर्गी में प्रजनन होता है। मुर्गे के सीमेन की एक बूंद में खरबों शुक्राणु होते हैं जबकि प्रजनन के लिए महज 20 हज़ार शुक्राणु काफी है। शेष शुक्राणु अधिकतम दस मिनट में मर जाते हैं। डाइलुएंट के जरिए सीमेन को पतला किया जाता है। इस तकनीक से सीमेन से जरूरत के मुताबिक शुक्राणु निकालकर शेष को डाइलुएट में 48 घंटे स्टोर कर सकते हैं। इस डफ़्लुएंट में शुक्राणु को जिंदा रखने के लिए शुगर, एमिनो एसिड, पोषण तत्व, एंजाइम आदि होते।