मुंबई, 22 मार्च । वित्तीय बाजारों पर अनुसंधानों परामर्श सेवाएं देने वाली कंपनी वर्ल्डलाइन की डिजिटल भुगतान पर एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में वर्ष 2021 में कार्डों की संख्या एक अरब के स्तर से ऊपर पहुंच गयी और वर्ष के दौरान यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) पर लेनदेन की संख्या 4.57 अरब से ऊपर रही।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में प्रचलन में विभिन्न प्रकार के भुगतान कार्डों की कुल संख्या 100 करोड़ 67 लाख तक पहुंच गए। दिसंबर 2021 के अंत तक क्रेडिट कार्ड की संख्या सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर करीब 6.9 करोड़ तक पहुंच गयी, जबकि दिसंबर 2020 में चलन में 6.04 करोड़ कार्ड थे।
इस दौरान चलन में मौजूद डेबिट कार्ड की संख्या एक साल पहले के 88.64 करोड़ से बढ़कर 93.78 करोड़ से अधिक पहुंच गयी जो सलाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस जारी किए गए क्रेडिट या डेबिट कार्ड में कितने कार्ड सक्रिय रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं या उनमें से कितने कार्ड का भुगतान या नगद निकासी के लिए उपयोग किया जा रहा है।
कुल कार्डों में 7 प्रतिशत क्रेडिट कार्ड और 93 प्रतिशत डेबिट कार्ड थे।
वर्ल्डलाइन इंडिया वार्षिक डिजिटल भुगतान रिपोर्ट 2021 के अनुसार पिछले वर्ष यूपीआई(यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) के जरिए कुल 4.57 अरब लेनदेन हुए, जो एक साल पहले की तुलना में 105 प्रतिशत अधिक रहे। इसी दौरान यूपीआई पर मूल्य के हिसाब से लेनेदेन 8.2 लाख करोड़ रहा। जो सलाना आधार पर 111 प्रतिशत ऊंचा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2021 में मोबाइल ऐप आधारित लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 106 प्रतिशत और इंटरनेट आधारित भुगतान की संख्या में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी।
क्रेडिट कार्ड से किए गए भुगतान का औसत आकार 2021 में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4,122 रुपए रहा। जबकि डेबिट कार्ड के जरिए लेनेदेन का औसत आकार 29 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1804 रुपए था।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 के दौरान एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और आईसीसीआई बैंक क्रेडिट कार्ड जारी करने के मामले में सबसे आगे रहे। जबकि डेबिट कार्ड जारी करने के मामले में तीन शीर्ष बैकों में एसबीआई, बैंक और बरोड़ा और पेटीएम पेमेंट्स बैंक का नाम है।
वर्ल्डलाइन के प्रबंध निदेशक(दक्षिण एशिया एवं पश्चिम एशिया) दीपक चंदनानी ने कहा, ” ग्राहक डिजिटल माध्यम से लेनेदेन की सुविधा को जिस तरह अपना रहे हैं, ऐसा देश में इससे पहले कभी नहीं दिखा था। बैंकिंग और वित्तीय सेवा उद्योग यूपीआई, कार्ड और पीपीआई तथा भारत बिल पे, एनईटीसी फास्टैग जैसे डिजिटल भुगतान के सुविधाओं के माध्यम से लोगों में डिजिटल भुगतान की आदत विकसित करने में सफलता रहा है। वित्तीय भुगतान स्वीकार करने के बुनियादी अवसंरचना भी धीरे-धीरे पनप रहे हैं।”